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Rigveda Mandal 5 / Sukta 61 / Mantra 2

87 Sukta
19 Mantra
5/61/2
Devata- मरुतो वाग्निश्च Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
क्व१॒॑ वोऽश्वाः॒ क्वा॒३॒॑भीश॑वः क॒थं शे॑क क॒था य॑य। पृ॒ष्ठे सदो॑ न॒सोर्यमः॑ ॥२॥

क्व॑ । वः॒ । अश्वाः॑ । क्व॑ । अ॒भीश॑वः । क॒थम् । शे॒क॒ । क॒था । य॒य॒ । पृ॒ष्ठे । सदः॑ । न॒सोः । यमः॑ ॥

Mantra without Swara
क्व१ वोऽश्वाः क्वा३भीशवः कथं शेक कथा यय। पृष्ठे सदो नसोर्यमः ॥

क्व। वः। अश्वाः। क्व। अभीशवः। कथम्। शेक। कथा। यय। पृष्ठे। सदः। नसोः। यमः ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 26 Mantra » 2

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Meaning
हे मनुष्यो ! (वः) आप लोगों के (क्व) कहाँ (अश्वाः) शीघ्र चलनेवाले घोड़े और (क्व) कहाँ (अभीशवः) अङ्गुलियाँ हैं, उनको आप लोग (कथम्) किस प्रकार (शेक) शीघ्र पहुँचनेवाले हूजिये और (कथा) किस प्रकार से (यय) जाइये और जैसे (नसोः) नासिकाओं के (पृष्ठे) पीछे के भाग में (सदः) छेदन करने योग्य वस्तु का (यमः) नियन्ता है, वैसे आप लोग हूजिये ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है । जब कोई विद्वानों को पूछे तब वे उत्तर दें और पक्षपात को छोड़कर न्यायाधीशों के सदृश होवें, तब सम्पूर्ण बोध को प्राप्त होवें ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

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