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Rigveda Mandal 5 / Sukta 61 / Mantra 18

87 Sukta
19 Mantra
5/61/18
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒त मे॑ वोचता॒दिति॑ सू॒तसो॑मे॒ रथ॑वीतौ। न कामो॒ अप॑ वेति मे ॥१८॥

उ॒त । मे॒ । वो॒च॒ता॒त् । इति॑ । सु॒तऽसो॑मे । रथ॑ऽवीतौ । न । कामः॑ । अप॑ । वे॒ति॒ । मे॒ ॥

Mantra without Swara
उत मे वोचतादिति सूतसोमे रथवीतौ। न कामो अप वेति मे ॥

उत। मे। वोचतात्। इति। सुतऽसोमे। रथऽवीतौ। न। कामः। अप। वेति। मे ॥१८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 29 Mantra » 3

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Meaning
हे विद्वन् ! आप (मे) मेरे लिये (रथवीतौ) वाहनों के गमन में (उत) और (सुतसोमे) उत्पन्न किये हुए ऐश्वर्य्य आदि में सत्य का उपदेश देने योग्य हैं (इति) इस प्रकार (वोचतात्) उपदेश देवें जिससे (मे) मेरी (कामः) कामना (न) नहीं (अप, वेति) नष्ट होती है ॥१८॥
Essence
सब मनुष्यों को चाहिये कि विद्वान् जनों के प्रति यह प्रार्थना करें कि आप लोग हम लोगों को ऐसे उपदेश करो, जिससे हम लोगों की इच्छायें सिद्ध होवें ॥१८॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

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