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Rigveda Mandal 5 / Sukta 61 / Mantra 16

87 Sukta
19 Mantra
5/61/16
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ते नो॒ वसू॑नि॒ काम्या॑ पुरुश्च॒न्द्रा रि॑शादसः। आ य॑ज्ञियासो ववृत्तन ॥१६॥

ते । नः॒ । वसू॑नि । काम्या॑ । पु॒रु॒ऽच॒न्द्राः । रि॒शा॒द॒सः॒ । आ । य॒ज्ञि॒या॒सः॒ । व॒वृ॒त्त॒न॒ ॥

Mantra without Swara
ते नो वसूनि काम्या पुरुश्चन्द्रा रिशादसः। आ यज्ञियासो ववृत्तन ॥

ते। नः। वसूनि। काम्या। पुरुऽचन्द्राः। रिशादसः। आ। यज्ञियासः। ववृत्तन ॥१६॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 29 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
जो (यज्ञियासः) यज्ञ के करने (रिशादसः) और हिंसकों के मारनेवाले (नः) हम लोगों के (पुरुश्चन्द्राः) बहुत सुवर्ण और (काम्या) सुन्दर (वसूनि) धनों को (आ, ववृत्तन) प्राप्त होते हैं (ते) वे विद्वान् हम लोगों के कल्याणकारी होते हैं ॥१६॥
Essence
हे मनुष्यो ! वे ही इस संसार में परोपकार के लिये वर्त्तमान हैं, जो न्याय से द्रव्य का संग्रह करते हैं ॥१६॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥