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Rigveda Mandal 5 / Sukta 61 / Mantra 15

87 Sukta
19 Mantra
5/61/15
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यू॒यं मर्तं॑ विपन्यवः प्रणे॒तार॑ इ॒त्था धि॒या। श्रोता॑रो॒ याम॑हूतिषु ॥१५॥

यू॒यम् । मर्त॑म् । वि॒प॒न्य॒वः॒ । प्र॒ऽने॒तारः॑ । इ॒त्था । धि॒या । श्रोता॑रः । याम॑ऽहूतिषु ॥

Mantra without Swara
यूयं मर्तं विपन्यवः प्रणेतार इत्था धिया। श्रोतारो यामहूतिषु ॥

यूयम्। मर्तम्। विपन्यवः। प्रऽनेतारः। इत्था। धिया। श्रोतारः। यामऽहूतिषु ॥१५॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 28 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (विपन्यवः) बुद्धिमानो ! (यूयम्) आप लोग (प्रणेतारः) प्रेरणा करने और (श्रोतारः) सुननेवाले जन (धिया) बुद्धि वा कर्म से (यामहूतिषु) उपरम अर्थात् निवृत्ति और आह्वानरूप कर्म्मों में (इत्था) इस प्रकार से (मर्त्तम्) मनुष्यों को प्रेरणा करो ॥१५॥
Essence
जो विद्वान् जन धर्मयुक्त व्यवहारों में मनुष्यों को प्रेरणा करके बुद्धिमान् करते हैं, वे धन्य होते हैं ॥१५॥
Subject
फिर विद्वद्विषय को कहते हैं ॥