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Rigveda Mandal 5 / Sukta 61 / Mantra 14

87 Sukta
19 Mantra
5/61/14
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
को वे॑द नू॒नमे॑षां॒ यत्रा॒ मद॑न्ति॒ धूत॑यः। ऋ॒तजा॑ता अरे॒पसः॑ ॥१४॥

कः । वे॒द॒ । नू॒नम् । ए॒षा॒म् । यत्र॑ । मद॑न्ति । धूत॑यः । ऋ॒तऽजा॑ताः । अ॒रे॒पसः॑ ॥

Mantra without Swara
को वेद नूनमेषां यत्रा मदन्ति धूतयः। ऋतजाता अरेपसः ॥

कः। वेद। नूनम्। एषाम्। यत्र। मदन्ति। धूतयः। ऋतऽजाताः। अरेपसः ॥१४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 28 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो ! (यत्रा) जहाँ (ऋतजाताः) सत्य में उत्पन्न होनेवाले (अरेपसः) अपराध से रहित (धूतयः) पाप को कम्पानेवाले (मदन्ति) प्रसन्न होते हैं वहाँ (एषाम्) इन वायु आदि के स्वरूप को (नूनम्) निश्चित (कः) कौन (वेद) जानता है ॥१४॥
Essence
हे मनुष्यो ! अपराध-अनपराध तथा सत्य और असत्य को कौन जानता है, यह हम पूछते हैं। जो प्रमाद से रहित और परमेश्वरभक्त होते हैं ॥१४॥
Subject
फिर उपदेशार्थ विषय को कहते हैं ॥