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Rigveda Mandal 5 / Sukta 61 / Mantra 13

87 Sukta
19 Mantra
5/61/13
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
युवा॒ स मारु॑तो ग॒णस्त्वे॒षर॑थो॒ अने॑द्यः। शु॒भं॒यावाप्र॑तिष्कुतः ॥१३॥

युवा॑ । सः । मारु॑तः । ग॒णः । त्वे॒षऽर॑थः । अने॑द्यः । शु॒भ॒म्ऽयावा॑ । अप्र॑तिऽस्कुतः ॥

Mantra without Swara
युवा स मारुतो गणस्त्वेषरथो अनेद्यः। शुभंयावाप्रतिष्कुतः ॥

युवा। सः। मारुतः। गणः। त्वेषऽरथः। अनेद्यः। शुभम्ऽयावा। अप्रतिऽस्कुतः ॥१३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 28 Mantra » 3

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Meaning
हे मनुष्यो ! जो (अनेद्यः) नहीं निन्दा करने योग्य (त्वेषरथः) प्रकाशवान् वाहन जिसका वह (शुभंयावा) जल को प्राप्त होनेवाला (अप्रतिष्कुतः) नहीं कम्पित दृढ़ (युवा) यौवनावस्था को प्राप्त (मारुतः) पवनों के समूह के सदृश मनुष्यों का (गणः) समूह है (सः) वह बहुत कार्य्यों को सिद्ध कर सकता है ॥१३॥
Essence
जो मनुष्य सम्पूर्ण स्त्रीपुरुषों को यौवनावस्थायुक्त और विद्वान् करते हैं, वे प्रशंसा करने योग्य, कल्याणकारी और दृढ़ होते हैं ॥१३॥
Subject
फिर स्त्री-पुरुष के विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥