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Rigveda Mandal 5 / Sukta 6 / Mantra 8

87 Sukta
10 Mantra
5/6/8
Devata- अग्निः Rishi- वसुश्रुत आत्रेयः Chhanda- निचृत्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
नवा॑ नो अग्न॒ आ भ॑र स्तो॒तृभ्यः॑ सुक्षि॒तीरिषः॑। ते स्या॑म॒ य आ॑नृ॒चुस्त्वादू॑तासो॒ दमे॑दम॒ इषं॑ स्तो॒तृभ्य॒ आ भ॑र ॥८॥

नवाः॑ । नः॒ । अ॒ग्ने॒ । आ । भ॒र॒ । स्तो॒तृऽभ्यः॑ । सु॒ऽक्षि॒तीः । इषः॑ । ते । स्या॒म॒ । ये । आ॒नृ॒चुः । त्वाऽदू॑तासः । दमे॑ऽदमे । इष॑म् । स्तो॒तृऽभ्यः॑ । आ । भ॒र॒ ॥

Mantra without Swara
नवा नो अग्न आ भर स्तोतृभ्यः सुक्षितीरिषः। ते स्याम य आनृचुस्त्वादूतासो दमेदम इषं स्तोतृभ्य आ भर ॥

नवाः। नः। अग्ने। आ। भर। स्तोतृऽभ्यः। सुऽक्षितीः। इषः। ते। स्याम। ये। आनृचुः। त्वाऽदूतासः। दमेऽदमे। इषम्। स्तोतृऽभ्यः। आ। भर ॥८॥

Ashtak » 3 Adhyay » 8 Varga » 23 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) राजन् ! (ये) जो (त्वादूतासः) त्वादूतास अर्थात् आप दूत जिनके ऐसे हम लोग आपका (आनृचुः) सत्कार करते हैं उन (नः) हम (स्तोतृभ्यः) धार्मिक विद्वानों के लिये आप (सुक्षितीः) सुन्दर पृथिवी वा मनुष्य विद्यमान जिनमें ऐसे (नवाः) नवीन (इषः) अन्न आदि को (आ, भर) धारण कीजिये जिससे (ते) वे हम लोग उत्साहित (स्याम) होवें और आप (स्तोतृभ्यः) सुपात्र अर्थात् सज्जन विद्वानों के लिये (दमेदमे) घर-घर में (इषम्) उत्तम इच्छा को (आ, भर) धारण कीजिये ॥८॥
Essence
वही राजा प्रशंसनीय होता है, जो उत्तम भृत्य और अतुल ऐश्वर्य्य को सब के सुख के लिये धारण करता है और दूत और चारों अर्थात् गुप्त संदेश देनेवालों से सब राज्य का समाचार जान के यथायोग्य प्रबन्ध करता है ॥८॥
Subject
अब राजविषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥