Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 6 / Mantra 4

87 Sukta
10 Mantra
5/6/4
Devata- अग्निः Rishi- वसुश्रुत आत्रेयः Chhanda- स्वराट्बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
आ ते॑ अग्न इधीमहि द्यु॒मन्तं॑ देवा॒जर॑म्। यद्ध॒ स्या ते॒ पनी॑यसी स॒मिद्दी॒दय॑ति॒ द्यवीषं॑ स्तो॒तृभ्य॒ आ भ॑र ॥४॥

आ । ते॒ । अ॒ग्ने॒ । इ॒धी॒म॒हि॒ । द्यु॒ऽमन्त॑म् । दे॒व॒ । अ॒जर॑म् । यत् । ह॒ । स्या । ते॒ । पनी॑यसी । स॒म्ऽइत् । दी॒दय॑ति । द्यवि॑ । इष॑म् । स्तो॒तृऽभ्यः॑ । आ । भ॒र॒ ॥

Mantra without Swara
आ ते अग्न इधीमहि द्युमन्तं देवाजरम्। यद्ध स्या ते पनीयसी समिद्दीदयति द्यवीषं स्तोतृभ्य आ भर ॥

आ। ते। अग्ने। इधीमहि। द्युऽमन्तम्। देव। अजरम्। यत्। ह। स्या। ते। पनीयसी। सम्ऽइत्। दीदयति। द्यवि। इषम्। स्तोतृऽभ्यः। आ। भर ॥४॥

Ashtak » 3 Adhyay » 8 Varga » 22 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (देव) सुख के देनेवाले (अग्ने) विद्वन् ! आप (द्युमन्तम्) प्रकाशित (अजरम्) जरावस्था से रहित अग्नि को प्रज्वलित करते हो और (यत्) जो (ते) आपकी (पनीयसी) अतीव प्रशंसा करने योग्य (समित्) समिध् है (स्या) वह (ते) आपके (द्यवि) प्रकाश में (दीदयति) प्रज्वलित की जाती है और जिससे (स्तोतृभ्यः) स्तुति करनेवालों के लिये (इषम्) अन्न आदि को (ह) निश्चय से हम लोग (आ, इधीमहि) प्रकाशित करें, उससे स्तुति करनेवालों के लिये अन्न आदि को आप (आ, भर) अच्छे प्रकार धारण कीजिये ॥४॥
Essence
हे विद्वन् ! जिस अग्नि आदि की विद्या को आप जानते हैं और जिस विद्या से आपकी प्रशंसा होती है, उसका हम लोगों को बोध दीजिये ॥४॥
Subject
अब अग्निविद्या के जाननेवाले विद्वान् के विषय को कहते हैं ॥