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Rigveda Mandal 5 / Sukta 59 / Mantra 8

87 Sukta
8 Mantra
5/59/8
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
मिमा॑तु॒ द्यौरदि॑तिर्वी॒तये॑ नः॒ सं दानु॑चित्रा उ॒षसो॑ यतन्ताम्। आचु॑च्यवुर्दि॒व्यं कोश॑मे॒त ऋषे॑ रु॒द्रस्य॑ म॒रुतो॑ गृणा॒नाः ॥८॥

मिमा॑तु । द्यौः । अदि॑तिः । वी॒तये॑ । नः॒ । सम् । दानु॑ऽचित्राः । उ॒षसः॑ । य॒त॒न्ता॒म् । आ । अ॒चु॒च्य॒वुः॒ । दि॒व्यम् । कोश॑म् । ए॒ते । ऋषे॑ । रु॒द्रस्य॑ । म॒रुतः॑ । गृ॒णा॒नाः ॥

Mantra without Swara
मिमातु द्यौरदितिर्वीतये नः सं दानुचित्रा उषसो यतन्ताम्। आचुच्यवुर्दिव्यं कोशमेत ऋषे रुद्रस्य मरुतो गृणानाः ॥

मिमातु। द्यौः। अदितिः। वीतये। नः। सम्। दानुऽचित्राः। उषसः। यतन्ताम्। आ। अचुच्यवुः। दिव्यम्। कोशम्। एते। ऋषे। रुद्रस्य। मरुतः। गृणानाः ॥८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 24 Mantra » 8

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1 Bhashyas
Meaning
हे (ऋषे) विद्या के देनेवाले ! जैसे (अदितिः) माता वा (द्यौः) प्रकाश के सदृश (वीतये) विज्ञान आदि की प्राप्ति के लिये (नः) हम लोगों का (मिमातु) आदर करे, वैसे आप आदर करिये जैसे (दानुचित्राः) अद्भुत दान जिनमें ऐसी (उषसः) प्रातर्वेलायें व्यवहारों को सिद्ध कराती हैं वा जैसे (एते) ये (रुद्रस्य) अन्यायकारियों को रुलानेवाले (दिव्यम्) कामना में श्रेष्ठ (कोशम्) धन के स्थान को (आ, अचुच्यवुः) प्राप्त होवें वैसे (गृणानाः) स्तुति करते हुए (मरुतः) मनुष्य (सम्) उत्तम प्रकार (यतन्ताम्) प्रयत्न करें ॥८॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो जन बिजुली, प्रातःकाल और ऋषि के सदृश धन के कोश को इकट्ठा करते हैं, वे प्रतिष्ठित होते हैं ॥८॥ इस सूक्त में पवन और बिजुली के गुण वर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इस से पूर्व सूक्तार्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह उनसठवाँ सूक्त और चौबीसवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥