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Rigveda Mandal 5 / Sukta 59 / Mantra 4

87 Sukta
8 Mantra
5/59/4
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
को वो॑ म॒हान्ति॑ मह॒तामुद॑श्नव॒त्कस्काव्या॑ मरुतः॒ को ह॒ पौंस्या॑। यू॒यं ह॒ भूमिं॑ कि॒रणं॒ न रे॑जथ॒ प्र यद्भर॑ध्वे सुवि॒ताय॑ दा॒वने॑ ॥४॥

कः । वः॒ । म॒हान्ति॑ । म॒ह॒ताम् । उत् । अ॒श्न॒व॒त् । कः । काव्या॑ । म॒रु॒तः॒ । कः । ह॒ । पौंस्या॑ । यू॒यम् । ह॒ । भूमि॑म् । कि॒रण॑म् । न । रे॒ज॒थ॒ । प्र । यत् । भर॑ध्वे । सु॒वि॒ताय॑ । दा॒वने॑ ॥

Mantra without Swara
को वो महान्ति महतामुदश्नवत्कस्काव्या मरुतः को ह पौंस्या। यूयं ह भूमिं किरणं न रेजथ प्र यद्भरध्वे सुविताय दावने ॥

कः। वः। महान्ति। महताम्। उत्। अश्नवत्। कः। काव्या। मरुतः। कः। ह। पौंस्या। यूयम्। ह। भूमिम्। किरणम्। न। रेजथ। प्र। यत्। भरध्वे। सुविताय। दावने ॥४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 24 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (मरुतः) विचार करनेवाले जनो ! (महताम्) बड़े (वः) आप लोगों के वा आप लोगों को (महान्ति) बड़े विज्ञान आदिकों को (कः) कौन (उत्, अश्नवत्) उत्तमता से प्राप्त होता है (कः) कौन (काव्या) बुद्धिमानों के कामों को उत्तमता से प्राप्त होता है (कः) कौन (ह) निश्चय से (पौंस्या) पुरुषों के इन बलों को प्राप्त होता है जिससे (यूयम्) आप लोग (भूमिम्) पृथिवी को (किरणम्) दीप्ति के (न) समान (रेजथ) कँपावें और (यत्) जिसको (ह) निश्चय (सुविताय) ऐश्वर्य और (दावने) देनेवाले के लिये (प्र, भरध्वे) धारण कीजिये, उसी को सब लोग प्राप्त होवें ॥४॥
Essence
इस मन्त्र में प्रश्न और उत्तर हैं-कौन यथार्थवक्ता जनों के समीप से बड़े विज्ञानों को प्राप्त होता है और कौन आप्तजनों के कर्म्मों को और कौन वीरों के बलों को प्राप्त होता है, इन प्रश्नों का उत्तर यह है कि पवित्र अन्तःकरण युक्त और धर्म्म के सुनने की इच्छा करनेवाले धर्मिष्ठ पुरुषार्थी और ब्रह्मचारी हैं ॥४॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥