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Rigveda Mandal 5 / Sukta 59 / Mantra 3

87 Sukta
8 Mantra
5/59/3
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- विराड्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
गवा॑मिव श्रि॒यसे॒ शृङ्ग॑मुत्त॒मं सूर्यो॒ न चक्षू॒ रज॑सो वि॒सर्ज॑ने। अत्या॑इव सु॒भ्व१॒॑श्चार॑वः स्थन॒ मर्या॑इव श्रि॒यसे॑ चेतथा नरः ॥३॥

गवा॑म्ऽइव । श्रि॒यसे॑ । शृङ्ग॑म् । उ॒त्त॒मम् । सूर्यः॑ । न । चक्षुः॑ । रज॑सः । वि॒ऽसर्ज॑ने । अत्याः॑ऽइव । सु॒ऽभ्वः॑ । चार॑वः । स्थ॒न॒ । मर्याः॑ऽइव । श्रि॒यसे॑ । चे॒त॒थ॒ । न॒रः॒ ॥

Mantra without Swara
गवामिव श्रियसे शृङ्गमुत्तमं सूर्यो न चक्षू रजसो विसर्जने। अत्याइव सुभ्व१श्चारवः स्थन मर्याइव श्रियसे चेतथा नरः ॥

गवाम्ऽइव। श्रियसे। शृङ्गम्। उत्ऽतमम्। सूर्यः। न। चक्षुः। रजसः। विऽसर्जने। अत्याःऽइव। सुऽभ्वः। चारवः। स्थन। मर्याःऽइव। श्रियसे। चेतथ। नरः ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 24 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (सुभ्वः) उत्तम प्रकार होनेवाले (चारवः) सुन्दर स्वभावयुक्त वा जानेवाले (नरः) नायक मनुष्यो ! (शृङ्गम्) ऊपर के (उत्तमम्) उत्तम भाग को (सूर्य्यः) सूर्य्य के (न) सदृश (गवामिव) किरणों के सदृश (श्रियसे) सेवने को (रजसः) लोक के (विसर्जने) त्याग में (चक्षुः) प्रकाश करनेवाले के सदृश आप लोग (स्थन) हूजिये और (अत्याइव) घोड़े के सदृश (मर्य्याइव) वा विद्वानों के सदृश (श्रियसे) आश्रयण करने को आप लोग (चेतथा) उत्तम प्रकार जानिये वा जनाइये ॥३॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो मनुष्य किरणों, सूर्य्य, घोड़े और मनुष्यों के सदृश प्रकाश, दान, वेग और विवेक को सेवते हैं, वे ही उत्तम सुख को प्राप्त होते हैं ॥३॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥