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Rigveda Mandal 5 / Sukta 57 / Mantra 8

87 Sukta
8 Mantra
5/57/8
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- विराड्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
ह॒ये नरो॒ मरु॑तो मृ॒ळता॑ न॒स्तुवी॑मघासो॒ अमृ॑ता॒ ऋत॑ज्ञाः। सत्य॑श्रुतः॒ कव॑यो॒ युवा॑नो॒ बृह॑द्गिरयो बृ॒हदु॒क्षमा॑णाः ॥८॥

ह॒ये । नरः॑ । मरु॑तः । मृ॒ळत॑ । नः॒ । तुवि॑ऽमघासः । अमृ॑ताः । ऋत॑ऽज्ञाः । सत्य॑ऽश्रुतः । कव॑यः । युवा॑नः । बृह॑त्ऽगिरयः । बृ॒हत् । उ॒क्षमा॑णाः ॥

Mantra without Swara
हये नरो मरुतो मृळता नस्तुवीमघासो अमृता ऋतज्ञाः। सत्यश्रुतः कवयो युवानो बृहद्गिरयो बृहदुक्षमाणाः ॥

हये। नरः। मरुतः। मृळत। नः। तुविऽमघासः। अमृताः। ऋतऽज्ञाः। सत्यऽश्रुतः। कवयः। युवानः। बृहत्ऽगिरयः। बृहत्। उक्षमाणाः ॥८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 22 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
(हये) हे (नरः) नायक (मरुतः) मरणशील जनो ! (तुवीमघासः) बहुत धनों से युक्त (अमृताः) अपने स्वरूप से मृत्युरहित (ऋतज्ञाः) यथार्थ को जाननेवाले (सत्यश्रुतः) सत्य को सुने हुए वा सत्य को सुननेवाले (युवानः) युवावस्था को प्राप्त (बृहद्गिरयः) बहुत प्रशंसावाले (बृहत्) बहुत (उक्षमाणाः) सेवन किये और (कवयः) विद्वान् होते हुए आप लोग (नः) हम लोगों को (मृळता) सुखी करो ॥८॥
Essence
जो मनुष्य यथार्थवक्ता विद्वानों का सेवन करते हैं, वे सत्य विद्या को प्राप्त होकर सदा ही प्रसन्न होते हैं ॥८॥ इस सूक्त में रुद्र और वायु के गुण वर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इस से पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह सत्तावनवाँ सूक्त और बाईसवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
फिर मरुद्विषयक विद्वानों के गुणों को कहते हैं ॥