Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 57 / Mantra 7

87 Sukta
8 Mantra
5/57/7
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
गोम॒दश्वा॑व॒द्रथ॑वत्सु॒वीरं॑ च॒न्द्रव॒द्राधो॑ मरुतो ददा नः। प्रश॑स्तिं नः कुणुत रुद्रियासो भक्षी॒य वोऽव॑सो॒ दैव्य॑स्य ॥७॥

गोऽम॑त् । अश्व॑ऽवत् । रथ॑ऽवत् । सु॒ऽवीर॑म् । च॒न्द्रऽव॑त् । राधः॑ । म॒रु॒तः॒ । द॒द॒ । नः॒ । प्रऽश॑स्तिम् । नः॒ । कृ॒णु॒त॒ । रु॒द्रि॒या॒सः॒ । भ॒क्षी॒य । वः॒ । अव॑सः । दैव्य॑स्य ॥

Mantra without Swara
गोमदश्वावद्रथवत्सुवीरं चन्द्रवद्राधो मरुतो ददा नः। प्रशस्तिं नः कुणुत रुद्रियासो भक्षीय वोऽवसो दैव्यस्य ॥

गोऽमत्। अश्वऽवत्। रथऽवत्। सुऽवीरम्। चन्द्रऽवत्। राधः। मरुतः। दद। नः। प्रऽशस्तिम्। नः। कृणुत। रुद्रियासः। भक्षीय। वः। अवसः। दैव्यस्य ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 22 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (रुद्रियासः) साधन करनेवालों में हुए (मरुतः) मनुष्यो ! आप लोग (नः) हम लोगों के लिये (गोमत्) बहुत गौवें विद्यमान जिसमें वा (अश्वावत्) बहुत घोड़ों से युक्त (रथवत्) व प्रशंसित वाहनों के सहित (चन्द्रवत्) वा सुवर्ण आदि से युक्त वा आनन्द आदि के देनेवाले (सुवीरम्) उत्तम वीर निमित्तक (राधः) धन को (ददा) दीजिये और (दैव्यस्य) विद्वानों से किये गये (अवसः) रक्षण आदि के सम्बन्ध में (नः) हम लोगों की (प्रशस्तिम्) प्रशंसा को (कृणुत) करिये जिससे (वः) आप लोगों के समीप से एक-एक मैं सुख का (भक्षीय) सेवन करूँ ॥७॥
Essence
जब मनुष्य सत्पुरुषों का सङ्ग करें, तब इस लोक में सम्पूर्ण ऐश्वर्य और परलोक में धर्म्म के अनुष्ठान करने की याचना करें ॥७॥
Subject
फिर मरुद्विषय को कहते हैं ॥