Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 55 / Mantra 9

87 Sukta
10 Mantra
5/55/9
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
मृ॒ळत॑ नो मरुतो॒ मा व॑धिष्टना॒स्मभ्यं॒ शर्म॑ बहु॒लं वि य॑न्तन। अधि॑ स्तो॒त्रस्य॑ स॒ख्यस्य॑ गातन॒ शुभं॑ या॒तामनु॒ रथा॑ अवृत्सत ॥९॥

मृ॒ळत॑ । नः॒ । म॒रु॒तः॒ । मा । व॒धि॒ष्ट॒न॒ । अ॒स्मभ्य॑म् । शर्म॑ । ब॒हु॒लम् । वि । य॒न्त॒न॒ । अधि॑ । स्तो॒त्रस्य॑ । स॒ख्यस्य॑ । गा॒त॒न॒ । शुभ॑म् । या॒ताम् । अनु॑ । रथाः॑ । अ॒वृ॒त्स॒त॒ ॥

Mantra without Swara
मृळत नो मरुतो मा वधिष्टनास्मभ्यं शर्म बहुलं वि यन्तन। अधि स्तोत्रस्य सख्यस्य गातन शुभं यातामनु रथा अवृत्सत ॥

मृळत। नः। मरुतः। मा। वधिष्टन। अस्मभ्यम्। शर्म। बहुलम्। वि। यन्तन। अधि। स्तोत्रस्य। सख्यस्य। गातन। शुभम्। याताम्। अनु। रथाः। अवृत्सत ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 18 Mantra » 4

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (मरुतः) विद्वानो ! आप लोग (न) हम लोगों को (मृळत) सुखी करिये किन्तु (मा) मत (वधिष्टन) नष्ट करिये और (अस्मभ्यम्) हम लोगों के लिये (बहुलम्) बहुत (शर्म) सुख वा गृह (वि, यन्तन) विशेष करके दीजिये और (अधि, स्तोत्रस्य) अधिक प्रशंसित (सख्यस्य) मित्रपने के (शुभम्) सुख की (गातन) प्रशंसा करिये और जो (याताम्) प्राप्त होते हुओं के (रथाः) वाहन (अवृत्सत) वर्त्तमान हैं, उनके (अनु) अनुगामी हूजिये ॥९॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि विद्वानों से प्रार्थना करके श्रेष्ठ गुणों को ग्रहण करें और सब जगह मित्रता करके सब के लिये सुख प्राप्त कराया जावे ॥९॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.