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Rigveda Mandal 5 / Sukta 55 / Mantra 10

87 Sukta
10 Mantra
5/55/10
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
यू॒यम॒स्मान्न॑यत॒ वस्यो॒ अच्छा॒ निरं॑ह॒तिभ्यो॑ मरुतो गृणा॒नाः। जु॒षध्वं॑ नो ह॒व्यदा॑तिं यजत्रा व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम् ॥१०॥

यू॒यम् । अ॒स्मान् । न॒य॒त॒ । वस्यः॑ । अच्छ॑ । निः । अं॒ह॒तिऽभ्यः॑ । म॒रु॒तः॒ । गृ॒णा॒नाः । जु॒षध्व॑म् । नः॒ । ह॒व्यऽदा॑तिम् । य॒ज॒त्राः॒ । व॒यम् । स्या॒म॒ । पत॑यः । र॒यी॒णाम् ॥

Mantra without Swara
यूयमस्मान्नयत वस्यो अच्छा निरंहतिभ्यो मरुतो गृणानाः। जुषध्वं नो हव्यदातिं यजत्रा वयं स्याम पतयो रयीणाम् ॥

यूयम्। अस्मान्। नयत। वस्यः। अच्छ। निः। अंहतिऽभ्यः। मरुतः। गृणानाः। जुषध्वम्। नः। हव्यऽदातिम्। यजत्राः। वयम्। स्याम। पतयः। रयीणाम् ॥१०॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 18 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (गृणानाः) स्तुति करते हुए (मरुतः) विद्वान् मनुष्यो ! (यूयम्) आप लोग (वस्यः) अति धन से युक्त (अस्मान्) हम लोगों की रक्षा कीजिये और (अंहतिभ्यः) मारते हैं जिनसे उन अस्त्रों से पृथक् (अच्छा) उत्तम प्रकार (निः, नयत) निरन्तर पहुँचाइये और (नः) हम लोगों की (जुषध्वम्) सेवा करिये। और हे (यजत्राः) मिलनेवाले जनो ! हम लोगों के लिये (हव्यदातिम्) देने योग्य दान को प्राप्त कराइये जिससे (वयम्) हम लोग (रयीणाम्) धनों के (पतयः) पालन करनेवाले (स्याम) होवें ॥१०॥
Essence
जिज्ञासुजन विद्वानों की प्रार्थना इस प्रकार करें कि आप लोग हम लोगों को दुष्ट आचरण से अलग करके धर्मयुक्त मार्ग को प्राप्त कराइये ॥१०॥ इस सूक्त में मरुत नाम से विद्वान् आदि के गुणों का वर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इस से पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह पचपनवाँ सूक्त और अठारहवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥