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Rigveda Mandal 5 / Sukta 54 / Mantra 15

87 Sukta
15 Mantra
5/54/15
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
तद्वो॑ यामि॒ द्रवि॑णं सद्यऊतयो॒ येना॒ स्व१॒॑र्ण त॒तना॑म॒ नॄँर॒भि। इ॒दं सु मे॑ मरुतो हर्यता॒ वचो॒ यस्य॒ तरे॑म॒ तर॑सा श॒तं हिमाः॑ ॥१५॥

तत् । वः॒ । या॒मि॒ । द्रवि॑णम् । स॒द्यः॒ऽऊ॒त॒यः॒ । येन॑ । स्वः॑ । न । त॒तना॑म । नॄन् । अ॒भि । इ॒दम् । सु । मे॒ । म॒रु॒तः॒ । ह॒र्य॒त॒ । वचः॑ । यस्य॑ । तरे॑म । श॒तम् । हिमाः॑ ॥

Mantra without Swara
तद्वो यामि द्रविणं सद्यऊतयो येना स्व१र्ण ततनाम नॄँरभि। इदं सु मे मरुतो हर्यता वचो यस्य तरेम तरसा शतं हिमाः ॥

तत्। वः। यामि। द्रविणम्। सद्यःऽऊतयः। येन। स्वः। न। ततनाम। नॄन्। अभि। इदम्। सु। मे। मरुतः। हर्यत। वचः। यस्य। तरेम। तरसा। शतम्। हिमाः ॥१५॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 16 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (सद्यऊतयः) शीघ्र रक्षण आदिवाले (मरुतः) मनुष्यो (वः) आप लोगों के समीप से जिस (द्रविणम्) धन वा यश को (यामि) प्राप्त होता हूँ (तत्) उसको आप लोग दीजिये (येना) जिससे (स्वः) सुख के (न) सदृश (नॄन्) मनुष्यों को (अभि, ततनाम) सब प्रकार विस्तृत करें और आप लोग (इदम्) इस (मे) मेरे (वचः) वचन की (सु, हर्यता) अच्छे प्रकार कामना करिये और (यस्य) जिसके (तरसा) बल से हम लोग (शतम्) सौ (हिमाः) वर्ष (तरेम) पार होवें, उससे आप लोग भी पार हूजिये ॥१५॥
Essence
हे विद्वानो ! आप लोग यश, धन, सुख, सत्य, वचन और बल को बढ़ाय दुःखों के पार हूजिये ॥१५॥ इस सूक्त में बिजुली और सुख के गुण वर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इस से पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह चौवनवाँ सूक्त और सोलहवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥