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Rigveda Mandal 5 / Sukta 53 / Mantra 2

87 Sukta
16 Mantra
5/53/2
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- बृहती Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
ऐतान्रथे॑षु त॒स्थुषः॒ कः शु॑श्राव क॒था य॑युः। कस्मै॑ सस्रुः सु॒दासे॒ अन्वा॒पय॒ इळा॑भिर्वृ॒ष्टयः॑ स॒ह ॥२॥

आ । ए॒तान् । रथे॑षु । त॒स्थुषः॑ । कः । शु॒श्रा॒व॒ । क॒था । य॒युः॒ । कस्मै॑ । स॒स्रुः॒ । सु॒ऽदासे॑ । अनु॑ । आ॒पयः॑ । इळा॑भिः । वृ॒ष्टयः॑ । स॒ह ॥

Mantra without Swara
ऐतान्रथेषु तस्थुषः कः शुश्राव कथा ययुः। कस्मै सस्रुः सुदासे अन्वापय इळाभिर्वृष्टयः सह ॥

आ। एतान्। रथेषु। तस्थुषः। कः। शुश्राव। कथा। ययुः। कस्मै। सस्रुः। सुऽदासे। अनु। आपयः। इळाभिः। वृष्टयः। सह ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 11 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो ! (रथेषु) विमान आदि वाहनों से (एतान्) इन (तस्थुषः) स्थावर काष्ठ आदि पदार्थों को (कः) कौन (आ, शुश्राव) अच्छे प्रकार सुनाता है और (कथा) कैसे मनुष्य (ययुः) प्राप्त होते हैं और (कस्मै) किस के लिये (सस्रुः) प्राप्त होते हैं (इळाभिः) अन्न आदिकों से (वृष्टयः) वृष्टियाँ और (आपयः) प्राप्त होनेवाले पदार्थ (सह) एक साथ (सुदासे) सुन्दर दास जिसके उसमें (अनु) अनुकूल प्राप्त होते हैं ॥२॥
Essence
कोई ही मनुष्य सम्पूर्ण शिल्पविद्या के व्यवहार करने को समर्थ होता है, जो व्याप्त और बहुत उत्तम गुणवाले बिजुली आदि पदार्थों को यथावत् जानता है ॥२॥
Subject
फिर मनुष्य कैसे पूँछ के क्या जानें, इस विषय को कहते हैं ॥