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Rigveda Mandal 5 / Sukta 53 / Mantra 13

87 Sukta
16 Mantra
5/53/13
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- निचृदुष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
येन॑ तो॒काय॒ तन॑याय धा॒न्यं१॒॑ बीजं॒ वह॑ध्वे॒ अक्षि॑तम्। अ॒स्मभ्यं॒ तद्ध॑त्तन॒ यद्व॒ ईम॑हे॒ राधो॑ वि॒श्वायु॒ सौभ॑गम् ॥१३॥

येन॑ । तो॒काय॑ । तन॑याय । धा॒न्य॑म् । बीज॑म् । वह॑ध्वे । अक्षि॑तम् । अ॒स्मभ्य॑म् । तत् । ध॒त्त॒न॒ । यत् । वः॒ । ईम॑हे । राधः॑ । वि॒श्वऽआयु । सौभ॑गम् ॥

Mantra without Swara
येन तोकाय तनयाय धान्यं१ बीजं वहध्वे अक्षितम्। अस्मभ्यं तद्धत्तन यद्व ईमहे राधो विश्वायु सौभगम् ॥

येन। तोकाय। तनयाय। धान्यम्। बीजम्। वहध्वे। अक्षितम्। अस्मभ्यम्। तत्। धत्तन। यत्। वः। ईमहे। राधः। विश्वऽआयु। सौभगम् ॥१३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 13 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! (येन) जिस कर्म्म से (तोकाय) तुरन्त उत्पन्न हुए सन्तान के और (तनयाय) कुमार के लिये (अक्षितम्) नाश से रहित (धान्यम्) तण्डुल आदि को और (बीजम्) बोने के योग्य को (वहध्वे) प्राप्त हूजिये और (यत्) जिस (विश्वायु) सम्पूर्ण आयु के करने और (सौभगम्) सौभाग्य को बढ़ानेवाले नाश से रहित (राघः) धन की (वः) आप लोगों के लिये (ईमहे) याचना करते हैं (तत्) उसको (अस्मभ्यम्) हम लोगों के लिये (धत्तन) धारण करिये ॥१३॥
Essence
जो मनुष्य सन्तानों की रक्षा के लिये धान्य आदि वस्तु की उत्तम प्रकार रक्षा करते हैं, वे नाश रहित सुख को प्राप्त होते हैं ॥१३॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥