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Rigveda Mandal 5 / Sukta 53 / Mantra 12

87 Sukta
16 Mantra
5/53/12
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- विराडुष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
कस्मा॑ अ॒द्य सुजा॑ताय रा॒तह॑व्याय॒ प्र य॑युः। ए॒ना यामे॑न म॒रुतः॑ ॥१२॥

कस्मै॑ । अ॒द्य । सुऽजा॑ताय । रा॒तऽह॑व्याय । प्र । य॒युः॒ । ए॒ना । यामे॑न । म॒रुतः॑ ॥

Mantra without Swara
कस्मा अद्य सुजाताय रातहव्याय प्र ययुः। एना यामेन मरुतः ॥

कस्मै। अद्य। सुऽजाताय। रातहव्याय। प्र। ययुः। एना। यामेन। मरुतः ॥१२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 13 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
जो (मरुतः) मनुष्य (अद्य) आज (एना) इस (यामेन) विरक्त हुए से (कस्मै) किस (सुजाताय) उत्तम विद्याओं में प्रसिद्ध (रातहव्याय) दिया दातव्य जिसने उसके लिये (प्र, ययुः) प्राप्त होते हैं, वे विद्या के देनेवाले होकर प्रशंसित होते हैं ॥१२॥
Essence
विद्या आदि उत्तम गुणों के दान के विना विद्वानों की प्रशंसा नहीं होती है ॥१२॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥