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Rigveda Mandal 5 / Sukta 53 / Mantra 11

87 Sukta
16 Mantra
5/53/11
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- स्वराट्बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
शर्धं॑शर्धं व एषां॒ व्रातं॑व्रातं ग॒णंग॑णं सुश॒स्तिभिः॑। अनु॑ क्रामेम धी॒तिभिः॑ ॥११॥

शर्ध॑म्ऽशर्धम् । वः॒ । ए॒षा॒म् । व्रात॑म्ऽव्रातम् । ग॒णम्ऽग॑णम् । सु॒श॒स्तिऽभिः॑ । अनु॑ । क्रा॒मे॒म॒ । धी॒तिऽभिः॑ ॥

Mantra without Swara
शर्धंशर्धं व एषां व्रातंव्रातं गणंगणं सुशस्तिभिः। अनु क्रामेम धीतिभिः ॥

शर्धम्ऽशर्धम्। वः। एषाम्। व्रातम्ऽव्रातम्। गणम्ऽगणम्। सुशस्तिऽभिः। अनु। क्रामेम। धीतिऽभिः ॥११॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 13 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे हम लोग (धीतिभिः) जैसे अङ्गुलियों से कर्म्मों को वैसे (सुशस्तिभिः) अच्छी प्रशंसाओं से (वः) आप लोगों के और (एषाम्) इनके (शर्धशर्धम्) बल-बल और (व्रातंव्रातम्) वर्त्तमान-वर्त्तमान (गणंगणम्) समूह-समूह को (अनु, क्रामेम) उल्लङ्घन करें, वैसे आप लोगों को भी करना चाहिये ॥११॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो मनुष्य पूर्ण बल को करें तो बहुत बलिष्ठों का भी उत्क्रमण करें ॥११॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥