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Rigveda Mandal 5 / Sukta 52 / Mantra 8

87 Sukta
17 Mantra
5/52/8
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
शर्धो॒ मारु॑त॒मुच्छं॑स स॒त्यश॑वस॒मृभ्व॑सम्। उ॒त स्म॒ ते शु॒भे नरः॒ प्र स्य॒न्द्रा यु॑जत॒ त्मना॑ ॥८॥

शर्धः॑ । मारु॑तम् । उत् । शं॒स॒ । स॒त्यऽश॑वसम् । ऋभ्व॑सम् । उ॒त । स्म॒ । ते । शु॒भे । नरः॑ । प्र । स्प॒न्द्राः । यु॒ज॒त॒ । त्मना॑ ॥

Mantra without Swara
शर्धो मारुतमुच्छंस सत्यशवसमृभ्वसम्। उत स्म ते शुभे नरः प्र स्यन्द्रा युजत त्मना ॥

शर्धः। मारुतम्। उत्। शंस। सत्यऽशवसम्। ऋभ्वसम्। उत। स्म। ते। शुभे। नरः। प्र। स्यन्द्राः। युजत। त्मना ॥८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 9 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! आप (मारुतम्) मनुष्यों के सम्बन्धी इस (शर्धः) बल और (सत्यशवसम्) सत्य बल जिसका उस (ऋभ्वसम्) बुद्धिमान् को ग्रहण करनेवाले की (उत्, शंस) अच्छे प्रकार स्तुति करो (उत) और (स्म) निश्चित (ते) वे (स्यन्द्राः) धीरतायुक्त गमनवाले (नरः) नायक आप लोग (शुभे) उत्तम कार्य में (त्मना) आत्मा से परमात्मा को (प्र, युजत) प्रयुक्त करो ॥८॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि उत्तम बल और परमात्मा की निरन्तर प्रशंसा करें ॥८॥
Subject
फिर विद्वान् क्या करे, इस विषय को कहते हैं ॥