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Rigveda Mandal 5 / Sukta 52 / Mantra 6

87 Sukta
17 Mantra
5/52/6
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
आ रु॒क्मैरा यु॒धा नर॑ ऋ॒ष्वा ऋ॒ष्टीर॑सृक्षत। अन्वे॑नाँ॒ अह॑ वि॒द्युतो॑ म॒रुतो॒ जज्झ॑तीरिव भा॒नुर॑र्त॒ त्मना॑ दि॒वः ॥६॥

आ । रु॒क्मैः । आ । यु॒धा । नरः॑ । ऋ॒ष्वाः । ऋ॒ष्टीः । अ॒सृ॒क्ष॒त॒ । अनु॑ । ए॒ना॒न् । अह॑ । वि॒ऽद्युतः॑ । म॒रुतः॑ । जज्झ॑तीःऽइव । भा॒नुः । अ॒र्त॒ । त्मना॑ । दि॒वः ॥

Mantra without Swara
आ रुक्मैरा युधा नर ऋष्वा ऋष्टीरसृक्षत। अन्वेनाँ अह विद्युतो मरुतो जज्झतीरिव भानुरर्त त्मना दिवः ॥

आ। रुक्मैः। आ। युधा। नरः। ऋष्वाः। ऋष्टीः। असृक्षत। अनु। एनान्। अह। विऽद्युतः। मरुतः। जज्झतीःऽइव। भानुः। अर्त। त्मना। दिवः ॥६॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 9 Mantra » 1

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Meaning
हे विद्वानो ! जैसे (ऋष्वाः) बड़े (नरः) अग्रणी जन (युधा) युद्ध से (ऋष्टीः) प्राप्त हुए सेनाओं के जन (आ, अनु, असृक्षत) सब प्रकार अनुकूल उत्पन्न करें और (एनान्) इनको (अह) ग्रहण करने में (जज्झतीरिव) शब्द करने वा शीघ्र चलनेवालियों के सदृश (विद्युतः) बिजुली और (मरुतः) पवन की (दिवः) कामना करते हुए जन और (भानुः) दीप्ति (त्मना) आत्मा से जानने योग्य हैं, उनको आप (रुक्मैः) रोचमान प्रदीप्तों से (आ) सब प्रकार (अर्त्त) प्राप्त हूजिये ॥६॥
Essence
विद्वान् जन मनुष्यों के लिये बिजुली आदि विद्याओं को प्राप्त करावें ॥६॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

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