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Rigveda Mandal 5 / Sukta 52 / Mantra 2

87 Sukta
17 Mantra
5/52/2
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- स्वस्त्यात्रेयः Chhanda- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
ते हि स्थि॒रस्य॒ शव॑सः॒ सखा॑यः॒ सन्ति॑ धृष्णु॒या। ते याम॒न्ना धृ॑ष॒द्विन॒स्त्मना॑ पान्ति॒ शश्व॑तः ॥२॥

ते । हि । स्थि॒रस्य॑ । शव॑सः । सखा॑यः । सन्ति॑ । धृ॒ष्णु॒ऽया । ते । याम॑न् । आ । धृ॒ष॒त्ऽविनः॑ । त्मना॑ । पा॒न्ति॒ । शश्व॑तः ॥

Mantra without Swara
ते हि स्थिरस्य शवसः सखायः सन्ति धृष्णुया। ते यामन्ना धृषद्विनस्त्मना पान्ति शश्वतः ॥

ते। हि। स्थिरस्य। शवसः। सखायः। सन्ति। धृष्णुऽया। ते। यामन्। आ। धृषत्ऽविनः। त्मना। पान्ति। शश्वतः ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 8 Mantra » 2

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Meaning
जो (स्थिरस्य) स्थिर (शवसः) बल के (धृष्णुया) दृढ़त्वादि गुणों से युक्त (सखायः) मित्र (सन्ति) हैं (ते) वे (हि) ही (त्मना) आत्मा से (यामन्) मार्ग में (धृषद्विनः) बहुत दृढ़त्व आदि गुणों से युक्त (आ, पान्ति) अच्छे प्रकार पालन करते हैं और जो मार्ग में प्रवृत्त हैं, (ते) वे (शश्वतः) निरन्तर पथिकों की रक्षा करते हैं ॥२॥
Essence
विद्वानों का ही मित्रपन और रक्षण स्थिर होता है, अन्य किसी का नहीं ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

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