Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 51 / Mantra 8

87 Sukta
15 Mantra
5/51/8
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- स्वस्त्यात्रेयः Chhanda- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
स॒जूर्विश्वे॑भिर्दे॒वेभि॑र॒श्विभ्या॑मु॒षसा॑ स॒जूः। आ या॑ह्यग्ने अत्रि॒वत्सु॒ते र॑ण ॥८॥

स॒ऽजूः । विश्वे॑भिः । दे॒वेभिः॑ । अ॒श्विऽभ्या॑म् । उ॒षसा॑ । स॒ऽजूः । आ । या॒हि॒ । अ॒ग्ने॒ । अ॒त्रि॒ऽवत् । सु॒ते । रण॒ ॥

Mantra without Swara
सजूर्विश्वेभिर्देवेभिरश्विभ्यामुषसा सजूः। आ याह्यग्ने अत्रिवत्सुते रण ॥

सऽजूः। विश्वेभिः। देवेभिः। अश्विऽभ्याम्। उषसा। सऽजूः। आ। याहि। अग्ने। अत्रिऽवत्। सुते। रण ॥८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 6 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) अग्नि के सदृश तेजस्वी विद्वन् ! जैसे अग्नि (विश्वेभिः) सम्पूर्ण (देवेभिः) पृथिवी आदिकों से (सजूः) संयुक्त तथा (अश्विभ्याम्) प्रकाशित और अप्रकाशित लोकों तथा (उषसा) प्रातःकाल से (सजूः) संयुक्त (सुते) उत्पन्न जगत् में (अत्रिवत्) व्यापक के सदृश है, वैसे (आ, याहि) प्राप्त हूजिये और (रण) उपदेश करिये ॥८॥
Essence
इस मन्त्र में उपमा और वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। हे मनुष्यो ! जो बिजुली सब पदार्थों में व्याप्त है, उसको विशेष करके जानिये ॥८॥
Subject
अब अग्नि के समान विद्वान् कैसा है, इस विषय को कहते हैं ॥