Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 51 / Mantra 4

87 Sukta
15 Mantra
5/51/4
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- स्वस्त्यात्रेयः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒यं सोम॑श्च॒मू सु॒तोऽम॑त्रे॒ परि॑ षिच्यते। प्रि॒य इन्द्रा॑य वा॒यवे॑ ॥४॥

अयम् । सोमः॑ । च॒मू इति॑ । सु॒तः । अम॑त्रे । परि॑ । सि॒च्य॒ते॒ । प्रि॒यः । इन्द्रा॑य । वा॒यवे॑ ॥

Mantra without Swara
अयं सोमश्चमू सुतोऽमत्रे परि षिच्यते। प्रिय इन्द्राय वायवे ॥

अयम्। सोमः। चमू इति। सुतः। अमत्रे। परि। सिच्यते। प्रियः। इन्द्राय। वायवे ॥४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 5 Mantra » 4

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जो (अयम्) यह (वायवे) बलवान् (इन्द्राय) अत्यन्त ऐश्वर्य्य से युक्त पुरुष के लिये (सुतः) उत्पन्न किया गया (प्रियः) सुन्दर (सोमः) ऐश्वर्य्य का योग (अमत्रे) पात्र में (परि) सब ओर से (सिच्यते) सींचा जाता है, वह (चमू) दो प्रकार की सेनाओं को सब प्रकार से वृद्धि करता है ॥४॥
Essence
जो वैद्यजन ओषधियों के सारभागों को निकाल कर रोगरहित मनुष्यों को करें तो सब ऐश्वर्य्यों से युक्त होते हैं ॥४॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.