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Rigveda Mandal 5 / Sukta 51 / Mantra 3

87 Sukta
15 Mantra
5/51/3
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- स्वस्त्यात्रेयः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
विप्रे॑भिर्विप्र सन्त्य प्रात॒र्याव॑भि॒रा ग॑हि। दे॒वेभिः॒ सोम॑पीतये ॥३॥

विप्रे॑भिः । वि॒प्र॒ । स॒न्त्य॒ । प्रा॒त॒र्याव॑ऽभिः । आ । ग॒हि॒ । दे॒वेभिः॑ । सोम॑ऽपीतये ॥

Mantra without Swara
विप्रेभिर्विप्र सन्त्य प्रातर्यावभिरा गहि। देवेभिः सोमपीतये ॥

विप्रेभिः। विप्र। सन्त्य। प्रातर्यावऽभिः। आ। गहि। देवेभिः। सोमऽपीतये ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 5 Mantra » 3

Bhashya

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Meaning
हे (सन्त्य) वर्त्तमान में श्रेष्ठ (विप्र) बुद्धिमान् ! आप (प्रातर्यावभिः) प्रातःकाल में जानेवाले (देवेभिः) विद्वानों के और (विप्रेभिः) बुद्धिमानों के साथ (सोमपीतये) सोमलता नामक ओषधि के रस के पान के लिये (आ, गहि) प्राप्त हूजिये ॥३॥
Essence
जब विद्वानों के साथ विद्वानों का सङ्ग होता है, तब ऐश्वर्य्य का प्रादुर्भाव होता है ॥३॥
Subject
विद्वानों के साथ विद्वान् क्या करे, इस विषय को कहते हैं ॥

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