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Rigveda Mandal 5 / Sukta 51 / Mantra 11

87 Sukta
15 Mantra
5/51/11
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- स्वस्त्यात्रेयः Chhanda- निचृदुष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
स्व॒स्ति नो॑ मिमीताम॒श्विना॒ भगः॑ स्व॒स्ति दे॒व्यदि॑तिरन॒र्वणः॑। स्व॒स्ति पू॒षा असु॑रो दधातु नः स्व॒स्ति द्यावा॑पृथि॒वी सु॑चे॒तुना॑ ॥११॥

स्व॒स्ति । नः॒ । मि॒मी॒ता॒म् । अ॒श्विना॑ । भगः॑ । स्व॒स्ति । दे॒वी । अदि॑तिः । अ॒न॒र्वणः॑ । स्व॒स्ति । पू॒षा । असु॑रः । द॒धा॒तु॒ । नः॒ । स्व॒स्ति । द्यावा॑पृथि॒वी इति॑ । सु॒ऽचे॒तुना॑ ॥

Mantra without Swara
स्वस्ति नो मिमीतामश्विना भगः स्वस्ति देव्यदितिरनर्वणः। स्वस्ति पूषा असुरो दधातु नः स्वस्ति द्यावापृथिवी सुचेतुना ॥

स्वस्ति। नः। मिमीताम्। अश्विना। भगः। स्वस्ति। देवी। अदितिः। अनर्वणः। स्वस्ति। पूषा। असुरः। दधातु। नः। स्वस्ति। द्यावापृथिवी इति। सुऽचेतुना ॥११॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 7 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (अश्विना) अध्यापक और उपदेशक जन (अनर्वणः) अश्वरहित का (स्वस्ति) सुख (मिमीताम्) रचें और (भगः) ऐश्वर्य्य को करनेवाला वायु (नः) हम लोगों के लिये (स्वस्ति) सुख (देवी) प्रकाशित (अदितिः) अखण्डविद्या (नः) हम लोगों के लिये (स्वस्ति) सुख (सुचेतुना) उत्तम विज्ञापन से (द्यावापृथिवी) प्रकाश और भूमि हम लोगों के लिये (स्वस्ति) सुख और (पूषा) पुष्टि करनेवाला दुग्धादि पदार्थ और (असुरः) मेघ हम लोगों के लिये सुख को (दधातु) धारण करे, वैसे आप लोगों के लिये भी वे सुख को धारण करें ॥११॥
Essence
जो मनुष्य पदार्थविद्या से जिन पदार्थों को उपयुक्त करें अर्थात् काम में लावें, वे इनसे उपकार ग्रहण करने को समर्थ होवें ॥११॥
Subject
फिर विद्वद्विषय को कहते हैं ॥