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Rigveda Mandal 5 / Sukta 50 / Mantra 2

87 Sukta
5 Mantra
5/50/2
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- प्रतिप्रभ आत्रेयः Chhanda- स्वराट्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
ते ते॑ देव नेत॒र्ये चे॒माँ अ॑नु॒शसे॑। ते रा॒या ते ह्या॒३॒॑पृचे॒ सचे॑महि सच॒थ्यैः॑ ॥२॥

ते । ते॒ । दे॒व॒ । ने॒तः॒ । ये । च॒ । इ॒मान् । अ॒नु॒ऽशसे॑ । ते । रा॒या । ते । हि । आ॒ऽपृचे॑ । सचे॑महि । स॒च॒थ्यैः॑ ॥

Mantra without Swara
ते ते देव नेतर्ये चेमाँ अनुशसे। ते राया ते ह्या३पृचे सचेमहि सचथ्यैः ॥

ते। ते। देव। नेतः। ये। च। इमान्। अनुऽशसे। ते। राया। ते। हि। आऽपृचे। सचेमहि। सचथ्यैः ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 4 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (नेतः) अग्रणी (देव) विद्वन् ! (ये) जो (ते) आपके (अनुशसे) अनुशासन के लिये (इमान्) इनको सम्बन्धित करते हैं (ते, ते) वे वे सत्कार करने योग्य हों (च) और जो (राया) धन से सब की रक्षा करते हैं (ते) वे प्रीति से युक्त होते हैं और जो (हि) निश्चित (आपृचे) सब ओर से सम्बन्ध के लिये (सचथ्यैः) पूर्ण सम्बन्धों में उत्पन्न हुओं के साथ वर्त्तमान हैं, उनके साथ हम लोग (सचेमहि) मिलें ॥२॥
Essence
हे विद्वन् ! आप इन वर्त्तमान और समीप में स्थित जनों को शिक्षा दीजिये और विद्वानों के साथ मिल के विद्याओं को प्राप्त हूजिये ॥२॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥