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Rigveda Mandal 5 / Sukta 49 / Mantra 3

87 Sukta
5 Mantra
5/49/3
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- प्रतिप्रभ आत्रेयः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ॒द॒त्र॒या द॑यते॒ वार्या॑णि पू॒षा भगो॒ अदि॑ति॒र्वस्त॑ उ॒स्रः। इन्द्रो॒ विष्णु॒र्वरु॑णो मि॒त्रो अ॒ग्निरहा॑नि भ॒द्रा ज॑नयन्त द॒स्माः ॥३॥

अ॒द॒त्र॒ऽया । द॒य॒ते॒ । वार्या॑णि । पू॒षा । भगः॑ । अदि॑तिः । वस्ते॑ । उ॒स्रः । इन्द्रः॑ । विष्णुः॑ । वरु॑णः । मि॒त्रः । अ॒ग्निः । अहा॑नि । भ॒द्रा । ज॒न॒य॒न्त॒ । द॒स्माः ॥

Mantra without Swara
अदत्रया दयते वार्याणि पूषा भगो अदितिर्वस्त उस्रः। इन्द्रो विष्णुर्वरुणो मित्रो अग्निरहानि भद्रा जनयन्त दस्माः ॥

अदत्रऽया। दयते। वार्याणि। पूषा। भगः। अदितिः। वस्ते। उस्रः। इन्द्रः। विष्णुः। वरुणः। मित्रः। अग्निः। अहानि। भद्रा। जनयन्त। दस्माः ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 3 Mantra » 3

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Meaning
हे मनुष्यो ! विद्वान् (अदत्रया, वार्य्याणि) खाने और स्वीकार करने योग्य अन्नादिकों को (दयते) देता है और (पूषा) पुष्टिकर्त्ता (भगः) सेवन करने योग्य तथा (अदितिः) माता (उस्रः) किरणों का (वस्ते) आच्छादन करती है और (इन्द्रः) सूर्य्य (विष्णुः) व्यापक बिजुली (वरुणः) उदान (मित्रः) प्राण (अग्निः) प्रसिद्ध अग्नि (दस्माः) और दुःख के नाश करनेवाले (भद्रा) कल्याणकारक (अहानि) दिनों को (जनयन्त) उत्पन्न करते हैं, उनको व्यर्थ मत व्यतीत करिये ॥३॥
Essence
जैसे माता अनुग्रह से अन्न-पान आदि के दान से सन्तानों का पालन करती है, वैसे ही सूर्य्य आदि पदार्थ दिन और रात्रि से सब की रक्षा करते हैं ॥३॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या जानना चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥