Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 48 / Mantra 2

87 Sukta
5 Mantra
5/48/2
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- प्रतिरथ आत्रेयः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ता अ॑त्नत व॒युनं॑ वी॒रव॑क्षणं समा॒न्या वृ॒तया॒ विश्व॒मा रजः॑। अपो॒ अपा॑ची॒रप॑रा॒ अपे॑जते॒ प्र पूर्वा॑भिस्तिरते देव॒युर्जनः॑ ॥२॥

ताः । अ॒त्न॒त॒ । व॒युन॑म् । वी॒रऽव॑क्षणम् । स॒मा॒न्या । वृ॒तया॑ । विश्व॑म् । आ । रजः॑ । अपो॒ इति॑ । अपा॑चीः । अप॑राः । अप॑ । ई॒ज॒ते॒ । प्र । पूर्वा॑भिः । ति॒र॒ते॒ । दे॒व॒ऽयुः । जनः॑ ॥

Mantra without Swara
ता अत्नत वयुनं वीरवक्षणं समान्या वृतया विश्वमा रजः। अपो अपाचीरपरा अपेजते प्र पूर्वाभिस्तिरते देवयुर्जनः ॥

ताः। अत्नत। वयुनम्। वीरऽवक्षणम्। समान्या। वृतया। विश्वम्। आ। रजः। अपो इति। अपाचीः। अपराः। अप। ईजते। प्र। पूर्वाभिः। तिरते। देवऽयुः। जनः ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 2 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
(देवयुः) विद्वानों की कामना करता हुआ (जनः) जन (वीरवक्षणम्) वीरों के पहुँचाने को (वयुनम्) कर्म वा प्रज्ञान को तथा (समान्या) तुल्य (वृतया) आवरण करनेवाली क्रिया से (विश्वम्) सम्पूर्ण (रजः) लोक-लोकान्तर और जिन (अपाचीः) नीचे चलनेवाले (अपराः) अन्य (अपः) जलों को (अप, ईजते) चलाता है वा (पूर्वाभिः) प्राचीन जलों से (प्र, तिरते) पार होता है (ताः) उन जलों को आप लोग (आ) सब ओर से (अत्नत) निरन्तर प्राप्त होओ ॥२॥
Essence
हे मनुष्यो ! आप लोग विद्वानों के सङ्ग की कामना करते हुए सम्पूर्ण विद्याओं को ग्रहण कीजिए ॥२॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.