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Rigveda Mandal 5 / Sukta 46 / Mantra 7

87 Sukta
8 Mantra
5/46/7
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- प्रतिक्षत्र आत्रेयः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
दे॒वानां॒ पत्नी॑रुश॒तीर॑वन्तु नः॒ प्राव॑न्तु नस्तु॒जये॒ वाज॑सातये। याः पार्थि॑वासो॒ या अ॒पामपि॑ व्र॒ते ता नो॑ देवीः सुहवाः॒ शर्म॑ यच्छत ॥७॥

दे॒वाना॑म् । पत्नीः॑ । उ॒श॒तीः । अ॒व॒न्तु॒ । नः॒ । प्र । अ॒व॒न्तु । नः॒ । तु॒जये॑ । वाज॑ऽसातये । याः । पार्थि॑वासः । याः । अ॒पाम् । अपि॑ । व्र॒ते । ताः । नः॒ । दे॒वीः॒ । सु॒ऽह॒वाः॒ । शर्म॑ । य॒च्छ॒त॒ ॥

Mantra without Swara
देवानां पत्नीरुशतीरवन्तु नः प्रावन्तु नस्तुजये वाजसातये। याः पार्थिवासो या अपामपि व्रते ता नो देवीः सुहवाः शर्म यच्छत ॥

देवानाम्। पत्नीः। उशतीः। अवन्तु। नः। प्र। अवन्तु। नः। तुजये। वाजऽसातये। याः। पार्थिवासः। याः। अपाम्। अपि। व्रते। ताः। नः। देवीः। सुऽहवाः। शर्म। यच्छत ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 2 Varga » 28 Mantra » 7

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Meaning
हे मनुष्यो ! (याः) जो (देवानाम्) विद्वानों वा राजाओं के न्याय की (उशतीः) कामना करती हुई (पत्नीः) स्त्रियाँ (नः) हम लोगों की वा हमारे सम्बन्धी पदार्थों की (अवन्तु) रक्षा करें और (तुजये) बल और (वाजसातये) संग्राम के लिये (प्र, अवन्तु) अच्छे प्रकार रक्षा करें और (याः) जो (पार्थिवासः) पृथिवी में विदित (अपाम्) जलों के (व्रते) स्वभाव में (अपि) भी (देवीः) प्रकाशमान (सुहवाः) उत्तम आह्वानवाली (नः) हम लोगों को (शर्म) सुखकारक गृह देवें और (ताः) उनको (नः) हम लोगों के लिये आप लोग (यच्छत) दीजिये ॥७॥
Essence
जैसे राजा लोग पुरुषों का न्याय करें, वैसे ही स्त्रियों के न्याय को रानियाँ करें ॥७॥
Subject
राजा के समान राजपत्नी न्याय करे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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