Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 46 / Mantra 6

87 Sukta
8 Mantra
5/46/6
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- प्रतिक्षत्र आत्रेयः Chhanda- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
उ॒त त्ये नः॒ पर्व॑तासः सुश॒स्तयः॑ सुदी॒तयो॑ न॒द्य१॒॑स्त्राम॑णे भुवन्। भगो॑ विभ॒क्ता शव॒साव॒सा ग॑मदुरु॒व्यचा॒ अदि॑तिः श्रोतु मे॒ हव॑म् ॥६॥

उ॒त । त्ये । नः॒ । पर्व॑तासः । सु॒ऽश॒स्तयः॑ । सु॒ऽदी॒तयः॑ । न॒द्यः॑ । त्राम॑णे । भु॒व॒न् । भगः॑ । वि॒ऽभ॒क्ता । शव॑सा । अव॑सा । आ । ग॒म॒त् । उ॒रु॒ऽव्यचाः॑ । अदि॑तिः । श्रो॒तु॒ । मे॒ । हव॑म् ॥

Mantra without Swara
उत त्ये नः पर्वतासः सुशस्तयः सुदीतयो नद्य१स्त्रामणे भुवन्। भगो विभक्ता शवसावसा गमदुरुव्यचा अदितिः श्रोतु मे हवम् ॥

उत। त्ये। नः। पर्वतासः। सुऽशस्तयः। सुऽदीतयः। नद्यः। त्रामणे। भुवन्। भगः। विऽभक्ता। शवसा। अवसा। आ। गमत्। उरुऽव्यचाः। अदितिः। श्रोतु। मे। हवम् ॥६॥

Ashtak » 4 Adhyay » 2 Varga » 28 Mantra » 6

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जो (पर्वतासः) मेघों के सदृश (सुशस्तयः) उत्तम प्रशंसायुक्त (नद्यः) नदियों के सदृश (सुदीतयः) प्रशंसित प्रकाशवाले (नः) हम लोगों को वा हमारे (त्रामणे) पालन व्यवहार के लिये (भुवन्) हों (उत) और (उरुव्यचाः) बहुतों में व्याप्त (अदितिः) खण्डन से रहित (भगः) आदर करने योग्य ऐश्वर्य का योग (विभक्ता) विभाग कर देनेवाला (शवसा) बल और (अवसा) रक्षण आदि से (आ, गमत्) सब प्रकार प्राप्त होवे और (मे) मेरे (हवम्) शब्द को (श्रोतु) सुने (त्ये) वे और वह सत्कार करने योग्य होवें ॥६॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है । जो मेघ के सदृश संसार के पालन करनेवाले प्रशंसित न्याय का विधान कर सम्पूर्ण प्रजा की विनती सुन के न्याय करें, वे विनययुक्त होते हैं ॥६॥
Subject
फिर मनुष्य क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥