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Rigveda Mandal 5 / Sukta 46 / Mantra 4

87 Sukta
8 Mantra
5/46/4
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- प्रतिक्षत्र आत्रेयः Chhanda- निचृत्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
उ॒त नो॒ विष्णु॑रु॒त वातो॑ अ॒स्रिधो॑ द्रविणो॒दा उ॒त सोमो॒ मय॑स्करत्। उ॒त ऋ॒भव॑ उ॒त रा॒ये नो॑ अ॒श्विनो॒त त्वष्टो॒त विभ्वानु॑ मंसते ॥४॥

उ॒त । नः॒ । विष्णुः॑ । उ॒त । वातः॑ । अ॒स्रिधः॑ । द्र॒वि॒णः॒ऽदा । उ॒त । सोमः॑ । मयः॑ । क॒र॒त् । उ॒त । ऋ॒भवः॑ । उ॒त । रा॒ये । नः॒ । अ॒श्विना॑ । उ॒त । त्वष्टा॑ । उ॒त । विभ्वा॑ । अनु॑ । मं॒स॒ते॒ ॥

Mantra without Swara
उत नो विष्णुरुत वातो अस्रिधो द्रविणोदा उत सोमो मयस्करत्। उत ऋभव उत राये नो अश्विनोत त्वष्टोत विभ्वानु मंसते ॥

उत। नः। विष्णुः। उत। वातः। अस्रिधः। द्रविणःऽदाः। उत। सोमः। मयः। करत्। उत। ऋभवः। उत। राये। नः। अश्विना। उत। त्वष्टा। उत। विऽभ्वा। अनु। मंसते ॥४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 2 Varga » 28 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! (नः) हम लोगों को (विष्णुः) व्यापक ईश्वर (उत) और (वातः) वायु (उत) और (अस्रिधः) नहीं हिंसा करने और (द्रविणोदाः) धन का देनेवाला (उत) और (सोमः) ऐश्वर्य्यवान् (उत) और (ऋभवः) बुद्धिमान् जन (उत) और (राये) धन के लिये (नः) हम लोगों को (उत) और (अश्विना) अध्यापक और उपदेशक जन (उत) और (त्वष्टा) सूक्ष्म करनेवाला (विभ्वा) समर्थ से (अनु, मंसते) अनुमान करें, उनसे विद्वान् (मयः) सुख को (करत्) सिद्ध करे ॥४॥
Essence
जो मनुष्य ईश्वर आदि पदार्थों का सेवन करते हैं, वे जानने योग्य पदार्थों के जाननेवाले होते हैं ॥४॥
Subject
अवश्य मनुष्यों को ईश्वरादिकों का सेवन करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥