Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 45 / Mantra 9

87 Sukta
11 Mantra
5/45/9
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- सदापृण आत्रेयः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ सूर्यो॑ यातु स॒प्ताश्वः॒ क्षेत्रं॒ यद॑स्योर्वि॒या दी॑र्घया॒थे। र॒घुः श्ये॒नः प॑तय॒दन्धो॒ अच्छा॒ युवा॑ क॒विर्दी॑दय॒द्गोषु॒ गच्छ॑न् ॥९॥

आ । सूर्यः॑ । या॒तु॒ । स॒प्तऽअ॑श्वः । क्षेत्र॑म् । यत् । अ॒स्य॒ । उ॒र्वि॒या । दी॒र्घ॒ऽया॒थे । र॒घुः । श्ये॒नः । प॒त॒य॒त् । अन्धः॑ । अच्छ॑ । युवा॑ । क॒विः । दी॒द॒य॒त् । गोषु॑ । गच्छ॑न् ॥

Mantra without Swara
आ सूर्यो यातु सप्ताश्वः क्षेत्रं यदस्योर्विया दीर्घयाथे। रघुः श्येनः पतयदन्धो अच्छा युवा कविर्दीदयद्गोषु गच्छन् ॥

आ। सूर्यः। यातु। सप्तऽअश्वः। क्षेत्रम्। यत्। अस्य। उर्विया। दीर्घऽयाथे। रघुः। श्येनः। पतयत्। अन्धः। अच्छ। युवा। कविः। दीदयत्। गोषु। गच्छन् ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 2 Varga » 27 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (सप्ताश्वः) सात प्रकार शीघ्र चलनेवाली किरणें जिसकी ऐसा (सूर्य्यः) सूर्य्य (यत्) जिस (क्षेत्रम्) निवास के स्थान को (अस्य) इस जगत् सम्बन्धिनी (उर्विया) पृथिवी के (दीर्घयाथे) चलें जिसमें ऐसे बड़े मार्ग में (रघुः) लघु (श्येनः) अन्तरिक्षस्थ वाज पक्षी के सदृश अन्तरिक्ष में जाता है, वैसे आप सेना के मध्य में (आ) सब प्रकार से (यातु) प्राप्त हूजिये और जैसे (गोषु) पृथिवियों में (गच्छन्) चलता हुआ (दीदयत्) प्रकाश करता है, वैसे (युवा) मिले और नहीं मिले हुए को करनेवाले यौवनावस्थायुक्त (कविः) बुद्धिमान् विद्वान् (अच्छा) उत्तम प्रकार (अन्धः) अन्न आदि का (पतयत्) स्वामी के सदृश आचरण करता है, यह जानो ॥९॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है । हे मनुष्यो ! जिस सूर्य्य में सात तत्त्व हैं और जो अपने चक्र को छोड़ के इधर-उधर नहीं जाता है और बहुत भूगोलों के मध्य में एक ही प्रकाशित है, वैसे ही सब पुरुष होवें ॥९॥
Subject
फिर सूर्य्य के समान मनुष्य क्या करें, उसका उपदेश करते हैं ॥