Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 45 / Mantra 11

87 Sukta
11 Mantra
5/45/11
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- सदापृण आत्रेयः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
धियं॑ वो अ॒प्सु द॑धिषे स्व॒र्षां ययात॑र॒न्दश॑ मा॒सो नव॑ग्वाः। अ॒या धि॒या स्या॑म दे॒वगो॑पा अ॒या धि॒या तु॑तुर्या॒मात्यंहः॑ ॥११॥

धिय॑म् । वः॒ । अ॒प्ऽसु । द॒धि॒षे॒ । स्वः॒ऽसाम् । यया॑ । अत॑रन् । दश॑ । मा॒सः । नव॑ऽग्वाः । अ॒या । धि॒या । स्या॒म॒ । दे॒वऽगो॑पाः । अ॒या । धि॒या । तु॒तु॒र्या॒म॒ । अति॑ । अंहः॑ ॥

Mantra without Swara
धियं वो अप्सु दधिषे स्वर्षां ययातरन्दश मासो नवग्वाः। अया धिया स्याम देवगोपा अया धिया तुतुर्यामात्यंहः ॥

धियम्। वः। अप्ऽसु। दधिषे। स्वःसाम्। यया। अतरन्। दश। मासः। नवऽग्वाः। अया। धिया। स्याम। देवऽगोपाः। अया। धिया। तुतुर्याम। अति। अंहः ॥११॥

Ashtak » 4 Adhyay » 2 Varga » 27 Mantra » 6

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! (यया) जिससे (नवग्वाः) नवीन गमनवाले (दश) दश (मासः) महीने (अतरन्) पार होते हैं (अया) इस (धिया) बुद्धि से हम लोग (देवगोपाः) विद्वानों के रक्षक (स्याम) होवें और (अया) इस (धिया) बुद्धि से (अंहः) पाप वा पाप से उत्पन्न दुःख का (अति, तुतुर्याम) अत्यन्त विनाश करें (वः) आपकी (स्वर्षाम्) सुख का विभाग करता है जिससे उस (धियम्) बुद्धि को (अप्सु) प्राणों में मैं (दधिषे) धारण करूँ ॥११॥
Essence
जो बुद्धिमान्, धनवान् और बल से युक्त होकर सब की रक्षा करते हैं, वे दुःखों के पार होते हैं ॥११॥ इस सूक्त में सूर्य और विद्वान् के गुण वर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इस से पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह पैंतालीसवाँ सूक्त और सत्ताईसवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
जो मनुष्य उत्तम बुद्धि की याचना करते हैं, वे विद्वान् होते हैं, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.