Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 42 / Mantra 18

87 Sukta
18 Mantra
5/42/18
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- अत्रिः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
सम॒श्विनो॒रव॑सा॒ नूत॑नेन मयो॒भुवा॑ सु॒प्रणी॑ती गमेम। आ नो॑ र॒यिं व॑हत॒मोत वी॒राना विश्वा॑न्यमृता॒ सौभ॑गानि ॥१८॥

सम् । अ॒श्विनोः॑ । अव॑सा । नूत॑नेन । म॒यः॒ऽभुवा॑ । सु॒ऽप्रनी॑ती । ग॒मे॒म॒ । आ । नः॒ । र॒यिम् । व॒ह॒त॒म् । आ । उ॒त । वी॒रान् । आ । विश्वा॑नि । अ॒मृ॒ता॒ । सौभ॑गानि ॥

Mantra without Swara
समश्विनोरवसा नूतनेन मयोभुवा सुप्रणीती गमेम। आ नो रयिं वहतमोत वीराना विश्वान्यमृता सौभगानि ॥

सम्। अश्विनोः। अवसा। नूतनेन। मयःऽभुवा। सुऽप्रनीती। गमेम। आ। नः। रयिम्। वहतम्। आ। उत। वीरान्। आ। विश्वानि। अमृता। सौभगानि ॥१८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 2 Varga » 19 Mantra » 8

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (मयोभुवा) सुख के करनेवालो (सुप्रणीती) उत्तम प्रकार वर्त्ती गई नीति जिनसे ऐसे अध्यापक और उपदेशक जनो ! जो आप दोनों (नः) हम लोगों के लिये (रयिम्) लक्ष्मी को (आ, वहतम्) प्राप्त कराइये (उत) भी (वीरान्) श्रेष्ठ शूरता आदि गुणों से युक्त शूरवीर जनों को (आ) प्राप्त कराइये और भी (विश्वानि) सम्पूर्ण (अमृता) नित्य (सौभगानि) सुन्दर ऐश्वर्य्यों के भावरूप को (आ) प्राप्त कराइये उन (अश्विनोः) अध्यापक और उपदेशकों के (नूतनेन) नवीन (अवसा) रक्षण से हम लोग सम्पूर्ण नित्य सुन्दर ऐश्वर्य्यों के भावरूपों को (सम्, गमेम) उत्तम प्रकार प्राप्त होवें ॥१८॥
Essence
हे मनुष्यो ! विद्वानों से रक्षित और बोध को प्राप्त हुए आप लोग लक्ष्मी और मनुष्यों के सहाय से सम्पूर्ण ऐश्वर्य्यों को प्राप्त हूजिये ॥१८॥ इस सूक्त में विश्वेदेव रुद्र और विद्वानों के गुण वर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इस से पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह बयालीसवाँ सूक्त और उन्नीसवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥