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Rigveda Mandal 5 / Sukta 41 / Mantra 16

87 Sukta
20 Mantra
5/41/16
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- अत्रिः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
क॒था दा॑शेम॒ नम॑सा सु॒दानू॑नेव॒या म॒रुतो॒ अच्छो॑क्तौ॒प्रश्र॑वसो म॒रुतो॒ अच्छो॑क्तौ। मा नोऽहि॑र्बु॒ध्न्यो॑ रि॒षे धा॑द॒स्माकं॑ भूदुपमाति॒वनिः॑ ॥१६॥

क॒था । दा॒शे॒म॒ । नम॑सा । सु॒ऽदानू॑न् । ए॒व॒ऽया । म॒रुतः॑ । अच्छ॑ऽउक्तौ । प्रऽश्र॑वसः । म॒रुतः॑ । अच्छ॑ऽउक्तौ । मा । नः॒ । अहिः॑ । बु॒ध्न्यः॑ । रि॒षे । धा॒त् । अ॒स्माक॑म् । भू॒त् । उ॒प॒मा॒ति॒ऽवनिः॑ ॥

Mantra without Swara
कथा दाशेम नमसा सुदानूनेवया मरुतो अच्छोक्तौप्रश्रवसो मरुतो अच्छोक्तौ। मा नोऽहिर्बुध्न्यो रिषे धादस्माकं भूदुपमातिवनिः ॥

कथा। दाशेम। नमसा। सुऽदानून्। एवऽया। मरुतः। अच्छऽउक्तौ। प्रऽश्रवसः। मरुतः। अच्छऽउक्तौ। मा। नः। अहिः। बुध्न्यः। रिषे। धात्। अस्माकम्। भूत्। उपमातिऽवनिः ॥१६॥

Ashtak » 4 Adhyay » 2 Varga » 16 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो ! (प्रश्रवसः) उत्तम श्रवण वा अन्न जिनका वे (मरुतः) मनुष्य हम लोग (एवया) गमन क्रिया से (अच्छोक्तौ) सत्य कथन में (नमसा) सत्कार वा अन्न आदि से (सुदानून्) उत्तम दानों को (कथा) कैसे (दाशेम) देवें जैसे (मरुतः) पवन (अच्छोक्तौ) उत्तम वचन में प्रवृत्त कराते हैं, वैसे (नः) हम लोगों को इस विषय में प्रवृत्त करिये। जैसे (बुध्न्यः) अन्तरिक्ष में हुआ (अहिः) मेघ (अस्माकम्) हम लोगों का (उपमातिवनिः) उपमा का विभाग करनेवाला (भूत्) हो और (रिषे) अन्न के लिये हम लोगों को (मा) नहीं (धात्) धारण करे, वैसे आप लोग भी हम लोगों को हिंसा में न प्रवृत्त कीजिये ॥१६॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है । हे मनुष्यो ! आप लोग विद्वानों के प्रति प्रश्न करके कि हम लोग क्या देवें और किससे क्या ग्रहण करें, ऐसा निश्चय करके व्यवहार करो और जैसे मेघ स्वयं छिन्न-भिन्न होके अन्यों की रक्षा करता है, वैसे ही विद्वान् जन स्वयं दूसरे से अपकार किये हुये से छिन्न-भिन्न होकर भी अन्यों का सदा उपकार करते हैं ॥१६॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥