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Rigveda Mandal 5 / Sukta 40 / Mantra 2

87 Sukta
9 Mantra
5/40/2
Devata- इन्द्र: Rishi- अत्रिः Chhanda- बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
वृषा॒ ग्रावा॒ वृषा॒ मदो॒ वृषा॒ सोमो॑ अ॒यं सु॒तः। वृष॑न्निन्द्र॒ वृष॑भिर्वृत्रहन्तम ॥२॥

वृषा॑ । ग्रावा॑ । वृषा॑ । मदः॑ । वृषा॑ । सोमः॑ । अ॒यम् । सु॒तः । वृष॑न् । इ॒न्द्र॒ । वृष॑ऽभिः । वृ॒त्र॒ह॒न्ऽत॒म॒ ॥

Mantra without Swara
वृषा ग्रावा वृषा मदो वृषा सोमो अयं सुतः। वृषन्निन्द्र वृषभिर्वृत्रहन्तम ॥

वृषा। ग्रावा। वृषा। मदः। वृषा। सोमः। अयम्। सुतः। वृषन्। इन्द्र। वृषऽभिः। वृत्रहन्ऽतम ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 2 Varga » 11 Mantra » 2

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Meaning
(वृषन्) बल की इच्छा करते हुए (वृत्रहन्तम) अतिशय करके शत्रुओं के और (इन्द्र) दुःखों के नाश करनेवाले जन ! जो (अयम्) यह (वृषा) आनन्द को उत्पन्न करने और (वृषा) वृष्टि करनेवाला (ग्रावा) मेघ और (मदः) आनन्द तथा (वृषा) सुख का वर्षानेवाला (सोमः) ओषधियों का समूह (सुतः) उत्पन्न किया गया है, उन (वृषभिः) मेघादिकों से कार्य्यों को सिद्ध कीजिये ॥२॥
Essence
जो मेघ आदि पदार्थ हैं, उनसे मनुष्य बहुत कार्य्यों को सिद्ध कर सकते हैं ॥२॥
Subject
अब मेघविषय को कहते हैं ॥

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