Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 4 / Mantra 8

87 Sukta
11 Mantra
5/4/8
Devata- अग्निः Rishi- वसुश्रुत आत्रेयः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ॒स्माक॑मग्ने अध्व॒रं जु॑षस्व॒ सह॑सः सूनो त्रिषधस्थ ह॒व्यम्। व॒यं दे॒वेषु॑ सु॒कृतः॑ स्याम॒ शर्म॑णा नस्त्रि॒वरू॑थेन पाहि ॥८॥

अ॒स्माक॑म् । अ॒ग्ने॒ । अ॒ध्व॒रम् । जु॒ष॒स्व॒ । सह॑सः । सू॒नो॒ इति॑ । त्रि॒ऽस॒ध॒स्थ॒ । ह॒व्यम् । व॒यम् । दे॒वेषु॑ । सु॒ऽकृतः॑ । स्या॒म॒ । शर्म॑णा । नः॒ । त्रि॒ऽवरू॑थेन । पा॒हि॒ ॥

Mantra without Swara
अस्माकमग्ने अध्वरं जुषस्व सहसः सूनो त्रिषधस्थ हव्यम्। वयं देवेषु सुकृतः स्याम शर्मणा नस्त्रिवरूथेन पाहि ॥

अस्माकम्। अग्ने। अध्वरम्। जुषस्व। सहसः। सूनो इति। त्रिऽसधस्थ। हव्यम्। वयम्। देवेषु। सुऽकृतः। स्याम। शर्मणा। नः। त्रिऽवरूथेन। पाहि ॥८॥

Ashtak » 3 Adhyay » 8 Varga » 19 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (सहसः, सूनो) बलवान् और अतिकालपर्य्यन्त ब्रह्मचर्य्य को धारण किये हुए जन के पुत्र और (त्रिषधस्थ) तीन अर्थात् प्रजा, भृत्य और अपने कुटुम्ब के जनों के साथ पक्षपात छोड़ के रहनेवाले (अग्ने) अग्नि के सदृश तेजस्वी वर्त्तमान राजन् ! आप (अस्माकम्) हम लोगों के (हव्यम्) देने योग्य सुख और (अध्वरम्) पालनरूप व्यवहार का (जुषस्व) सेवन करो और (त्रिवरूथेन) वर्षा, शीत और ग्रीष्मकाल में श्रेष्ठ (शर्मणा) गृह के साथ (नः) हम लोगों का निरन्तर (पाहि) पालन करो जिससे (वयम्) हम लोग (देवेषु) विद्वानों में (सुकृतः) धर्म्मसम्बन्धी कर्म्म करनेवाले (स्याम) होवें ॥८॥
Essence
सब जन राजा के प्रति यह कहें कि हे राजन् ! आप हम लोगों का पालन यथावत् करिये, आपसे रक्षित हम लोग निरन्तर धर्माचरणयुक्त होकर आपकी उन्नति को जैसे =जिस प्रकार करें ॥८॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥