Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 4 / Mantra 10

87 Sukta
11 Mantra
5/4/10
Devata- अग्निः Rishi- वसुश्रुत आत्रेयः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
यस्त्वा॑ हृ॒दा की॒रिणा॒ मन्य॑मा॒नोऽम॑र्त्यं॒ मर्त्यो॒ जोह॑वीमि। जात॑वेदो॒ यशो॑ अ॒स्मासु॑ धेहि प्र॒जाभि॑रग्ने अमृत॒त्वम॑श्याम् ॥१०॥

यः । त्वा॒ । हृ॒दा । की॒रिणा॑ । मन्य॑मानः । अम॑र्त्यम् । मर्त्यः॑ । जोह॑वीमि । जात॑ऽवेदः । यशः॑ । अ॒स्मासु॑ । धे॒हि॒ । प्र॒ऽजाभिः॑ । अ॒ग्ने॒ । अ॒मृ॒त॒ऽत्वम् । अ॒श्या॒म् ॥

Mantra without Swara
यस्त्वा हृदा कीरिणा मन्यमानोऽमर्त्यं मर्त्यो जोहवीमि। जातवेदो यशो अस्मासु धेहि प्रजाभिरग्ने अमृतत्वमश्याम् ॥

यः। त्वा। हृदा। कीरिणा। मन्यमानः। अमर्त्यम्। मर्त्यः। जोहवीमि। जातऽवेदः। यशः। अस्मासु। धेहि। प्रजाभिः। अग्ने। अमृतऽत्वम्। अश्याम् ॥१०॥

Ashtak » 3 Adhyay » 8 Varga » 19 Mantra » 5

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (जातवेदः) विज्ञान से युक्त (अग्ने) अग्नि के सदृश वर्तमान राजन् ! (यः) जो (मन्यमानः) जानता हुआ (मर्त्यः) मनुष्य मैं (हृदा) अन्तःकरण और (कीरिणा) स्तुति करनेवाले से (अमर्त्यम्) मरणधर्म्म से रहित (त्वा) आपकी (जोहवीमि) अत्यन्त स्पर्द्धा करूँ और जैसे (प्रजाभिः) पालन करने योग्य प्रजाओं के साथ (अमृतत्वम्) मोक्षभाव को (अश्याम्) प्राप्त होऊँ, वैसे (अस्मासु) हम लोगों में (यशः) कीर्त्ति को (धेहि) धरिये, स्थापन कीजिये ॥१०॥
Essence
जैसे प्रजायें राजा के हित को सिद्ध करती हैं, वैसे ही राजा प्रजा के सुख की इच्छा करें। इस प्रकार परस्पर प्रीति से अतुल सुख को प्राप्त होवें ॥१०॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.