Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 34 / Mantra 9

87 Sukta
9 Mantra
5/34/9
Devata- इन्द्र: Rishi- संवरणः प्राजापत्यः Chhanda- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
स॒ह॒स्र॒सामाग्नि॑वेशिं गृणीषे॒ शत्रि॑मग्न उप॒मां के॒तुम॒र्यः। तस्मा॒ आपः॑ सं॒यतः॑ पीपयन्त॒ तस्मि॑न्क्ष॒त्रमम॑वत्त्वे॒षम॑स्तु ॥९॥

स॒ह॒स्र॒ऽसाम् । आग्नि॑ऽवेशिम् । गृ॒णी॒षे॒ । शत्रि॑म् । अ॒ग्ने॒ । उ॒प॒ऽमाम् । के॒तुम् । अ॒र्यः । तस्मै॑ । आपः॑ । स॒म्ऽयतः॑ । पी॒प॒य॒न्त॒ । तस्मि॑न् । क्ष॒त्रम् । अम॑ऽवत् । त्वे॒षम् । अ॒स्तु॒ ॥

Mantra without Swara
सहस्रसामाग्निवेशिं गृणीषे शत्रिमग्न उपमां केतुमर्यः। तस्मा आपः संयतः पीपयन्त तस्मिन्क्षत्रममवत्त्वेषमस्तु ॥

सहस्रऽसाम्। आग्निऽवेशिम्। गृणीषे। शत्रिम्। अग्ने। उपऽमाम्। केतुम्। अर्यः। तस्मै। आपः। संऽयतः। पीपयन्त। तस्मिन्। क्षत्रम्। अमऽवत्। त्वेषम्। अस्तु ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 2 Varga » 4 Mantra » 4

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) अग्नि के सदृश तेजस्वी राजन् ! (अर्यः) स्वामी आप (सहस्रसाम्) असङ्ख्य पदार्थों के विभाग करने (आग्निवेशिम्) अग्नि को प्रवेश कराने और (शत्रिम्) दुःख के नाश करनेवाले (उपमाम्) दृष्टान्त और (केतुम्) बुद्धि की (गृणीषे) स्तुति करते हो (तस्मै) उन आपके लिये (आपः) जलों के सदृश प्रजायें (संयतः) इन्द्रियों के निग्रह से युक्त हुईं (पीपयन्त) तृप्ति करती हैं (तस्मिन्) उन आप राजा में (अमवत्) गृह के तुल्य (त्वेषम्) प्रकाश से युक्त (क्षत्रम्) धन वा राज्य (अस्तु) होवे ॥९॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो राजा होने की इच्छा करे तो सर्व शास्त्रों में प्रविष्ट हुई स्वच्छ और उत्तम गुणों से युक्त बुद्धि को प्राप्त होकर जैसे पितृजन पुत्रों का पालन करते वैसे प्रजाओं का पालन करे, ऐसा करने पर श्रेष्ठ राज्य बढ़े ॥९॥ इस सूक्त में इन्द्र विद्वान् और प्रजा के गुण वर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इस से पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह चौंतीसवाँ सूक्त और चौथा वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.