Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 31 / Mantra 3

87 Sukta
13 Mantra
5/31/3
Devata- इन्द्र: Rishi- अमहीयुः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
उद्यत्सहः॒ सह॑स॒ आज॑निष्ट॒ देदि॑ष्ट॒ इन्द्र॑ इन्द्रि॒याणि॒ विश्वा॑। प्राचो॑दयत्सु॒दुघा॑ व॒व्रे अ॒न्तर्वि ज्योति॑षा संववृ॒त्वत्तमो॑ऽवः ॥३॥

उत् । यत् । सहः॑ । सह॑सः । आ । अज॑निष्ट । देदि॑ष्टे । इन्द्रः॑ । इ॒न्द्रि॒याणि॑ । विश्वा॑ । प्र । अ॒चो॒द॒य॒त् । सु॒ऽदुघाः॑ । व॒व्रे । अ॒न्तः । वि । ज्योति॑षा । स॒म्ऽव॒वृ॒त्वत् । तमः॑ । अ॒व॒रित्य॑वः ॥

Mantra without Swara
उद्यत्सहः सहस आजनिष्ट देदिष्ट इन्द्र इन्द्रियाणि विश्वा। प्राचोदयत्सुदुघा वव्रे अन्तर्वि ज्योतिषा संववृत्वत्तमोऽवः ॥

उत्। यत्। सहः। सहसः। आ। अजनिष्ट। देदिष्टे। इन्द्रः। इन्द्रियाणि। विश्वा। प्र। अचोदयत्। सुऽदुघाः। वव्रे। अन्तः। वि। ज्योतिषा। संऽववृत्वत्। तमः। अवरित्यवः ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 1 Varga » 29 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे राजन् ! जैसे (इन्द्रः) योगरूप ऐश्वर्य से युक्त सूर्य्य (सहसः) बल से जिस (सहः) बल को (उत्, आ, अजनिष्ट) उत्पन्न करता (विश्वा) सम्पूर्ण (इन्द्रियाणि) श्रोत्र आदि इन्द्रियों वा धनों का (देदिष्टे) उपदेश देता और (प्र, अचोदयत्) प्रेरणा करता और (सुदुघाः) उत्तम प्रकार कामनाओं को पूर्ण करनेवाली क्रियाओं का (वव्रे) स्वीकार करता है, वैसे (अन्तः) मध्य में (ज्योतिषा) प्रकाश से (संववृत्वत्) घेरनेवाली (तमः) रात्रि की (वि) विशेष करके (अवः) रक्षा करो ॥३॥
Essence
जो राजा बल से बल और धन से धन को उत्पन्न करके, न्याय के प्रकाश से अन्यायरूप अन्धकार का निवारण कर, पूर्ण मनोरथों से युक्त प्रजाओं को करके विद्या आदि उत्तम गुणों के ग्रहण के लिये प्रेरणा करता है, वही अखण्ड ऐश्वर्य्यवाला सदा होता है ॥३॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.