Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 31 / Mantra 11

87 Sukta
13 Mantra
5/31/11
Devata- इन्द्रः कुत्सश्च Rishi- अमहीयुः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
सूर॑श्चि॒द्रथं॒ परि॑तक्म्यायां॒ पूर्वं॑ कर॒दुप॑रं जूजु॒वांस॑म्। भर॑च्च॒क्रमेत॑शः॒ सं रि॑णाति पु॒रो दध॑त्सनिष्यति॒ क्रतुं॑ नः ॥११॥

सूरः॑ । चि॒त् । रथ॑म् । परि॑ऽतक्म्यायाम् । पूर्व॑म् । क॒र॒त् । उप॑रम् । जू॒जु॒ऽवांस॑म् । भर॑त् । च॒क्रम् । एत॑शः । सम् । रि॒णा॒ति॒ । पु॒रः । दध॑त् । स॒नि॒ष्य॒ति॒ । क्रतु॑म् । नः॒ ॥

Mantra without Swara
सूरश्चिद्रथं परितक्म्यायां पूर्वं करदुपरं जूजुवांसम्। भरच्चक्रमेतशः सं रिणाति पुरो दधत्सनिष्यति क्रतुं नः ॥

सूरः। चित्। रथम्। परिऽतक्म्यायाम्। पूर्वम्। करत्। उपरम्। जूजुऽवांसम्। भरत्। चक्रम्। एतशः। सम्। रिणाति। पुरः। दधत्। सनिष्यति। क्रतुम्। नः ॥११॥

Ashtak » 4 Adhyay » 1 Varga » 31 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! जो (सूरः) सूर्य्य के (चित्) सदृश (परितक्म्यायाम्) सर्व ओर से हर्ष होते हैं जिस रात्रि में उसमें (पूर्वम्) प्रथम (रथम्) सुन्दर वाहन को (उपरम्) मेघ के सदृश (करत्) करे और (जूजुवांसम्) अत्यन्त वेग से युक्त (चक्रम्) कलाओं के चलानेवाले चक्र को (एतशः) जैसे घोड़ा घोड़ेवाले को वैसे सब प्रकार (भरत्) धारण करे (पुरः) पहिले चक्र को (सम्, रिणाति) प्राप्त होता, वाहन को (दधत्) धारण करता और (नः) हम लोगों की (क्रतुम्) बुद्धि वा कर्म्मों का (सनिष्यति) सेवन करे, उसका आप सब प्रकार सत्कार करें ॥११॥
Essence
इस मन्त्र में उपमा और वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं । जो मनुष्य कलाकौशल से वाहनों के यन्त्रों को रच के जल और अग्नि के अत्यन्त योग से चक्रों को उत्तम प्रकार चलाय कार्य्यों को सिद्ध करें तो जैसे सूर्य्य और पवन मेघ को वैसे बहुत भारयुक्त वाहन को अन्तरिक्ष जल और स्थल में पहुँचाने को समर्थ होवें ॥११॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥