Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 30 / Mantra 11

87 Sukta
15 Mantra
5/30/11
Devata- इन्द्र ऋणञ्चयश्च Rishi- बभ्रु रात्रेयः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
यदीं॒ सोमा॑ ब॒भ्रुधू॑ता॒ अम॑न्द॒न्नरो॑रवीद्वृष॒भः साद॑नेषु। पु॒रं॒द॒रः प॑पि॒वाँ इन्द्रो॑ अस्य॒ पुन॒र्गवा॑मददादु॒स्रिया॑णाम् ॥११॥

यत् । ई॒म् । सोमाः॑ । ब॒भ्रुऽधू॑ताः । अम॑न्दन् । अरो॑रवीत् । वृ॒ष॒भः । साद॑नेषु । पु॒र॒म्ऽद॒रः । प॒पि॒ऽवान् । इन्द्रः॑ । अ॒स्य॒ । पुनः॑ । गवा॑म् । अ॒द॒दा॒त् । उ॒स्रिया॑णाम् ॥

Mantra without Swara
यदीं सोमा बभ्रुधूता अमन्दन्नरोरवीद्वृषभः सादनेषु। पुरंदरः पपिवाँ इन्द्रो अस्य पुनर्गवामददादुस्रियाणाम् ॥

यत्। ईम्। सोमाः। बभ्रुऽधूताः। अमन्दन्। अरोरवीत्। वृषभः। सदनेषु। पुरंऽदरः। पपिऽवान्। इन्द्रः। अस्य। पुनः। गवाम्। अददात्। उस्रियाणाम् ॥११॥

Ashtak » 4 Adhyay » 1 Varga » 28 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे राजन् ! जैसे (इन्द्रः) सूर्य (अस्य) इस मेघ के (सादनेषु) स्थानों में (पपिवान्) पीवने और (पुरन्दरः) पुरों को नाश करनेवाला (उस्रियाणाम्) किरणों और (गवाम्) गौओं के (पुनः) फिर तेज को (अददात्) देता है (वृषभः) वृष्टि करनेवाला हुआ (अरोरवीत्) अत्यन्त शब्द करता है (यत्) जिससे (बभ्रुधूताः) विद्या को धारण किये हुओं से पवित्र किये गये (सोमाः) सोम ओषधि के सदृश वर्त्तमान पदार्थ (ईम्) सब ओर से उत्पन्न होते हैं, जिससे प्राणी (अमन्दन्) आनन्दित होते हैं, वैसे आप प्रजाओं में वर्त्ताव कीजिये ॥११॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है । जो राजा सूर्य्य और मेघ के स्वभाव के सदृश स्वभाववाला हुआ धर्म्मशास्त्र में कहे हुए अष्ट मास परिमाण परिमित प्रजाओं से कर लेता है और चार मास यथेष्ट पदार्थों को देता है, इस प्रकार सब प्रजाओं को प्रसन्न करता है, वही सब प्रकार से ऐश्वर्यवान् होता है ॥११॥
Subject
अब वीरराजविषय को कहते हैं ॥