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Rigveda Mandal 5 / Sukta 27 / Mantra 1

87 Sukta
6 Mantra
5/27/1
Devata- अग्निः Rishi- वसुयव आत्रेयः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अन॑स्वन्ता॒ सत्प॑तिर्मामहे मे॒ गावा॒ चेति॑ष्ठो॒ असु॑रो म॒घोनः॑। त्रै॒वृ॒ष्णो अ॑ग्ने द॒शभिः॑ स॒हस्रै॒र्वैश्वा॑नर॒ त्र्य॑रुणश्चिकेत ॥१॥

अन॑स्वन्ता । सत्ऽप॑तिः । म॒म॒हे॒ । मे॒ । गावा॑ । चेति॑ष्ठः । असु॑रः । म॒घोनः॑ । त्रै॒वृ॒ष्णः । अ॒ग्ने॒ । द॒शऽभिः॑ । स॒हस्रैः॑ । वैश्वा॑नर । त्रिऽअ॑रुणः । चि॒के॒त॒ ॥

Mantra without Swara
अनस्वन्ता सत्पतिर्मामहे मे गावा चेतिष्ठो असुरो मघोनः। त्रैवृष्णो अग्ने दशभिः सहस्रैर्वैश्वानर त्र्यरुणश्चिकेत ॥

अनस्वन्ता। सत्ऽपतिः। ममहे। मे। गावा। चेतिष्ठः। असुरः। मघोनः। त्रैवृष्णः। अग्ने। दशऽभिः। सहस्रैः। वैश्वानर। त्रिऽअरुणः। चिकेत ॥१॥

Ashtak » 4 Adhyay » 1 Varga » 21 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे (वैश्वानर) सब में प्रकाशमान (अग्ने) अग्नि के सदृश ! (सत्पतिः) श्रेष्ठ जनों के पालनेवाले (दशभिः) दश (सहस्रैः) सहस्रों के साथ (अनस्वन्ता) उत्तम शकट आदि वाहनों से युक्त (गावा) गौ अर्थात् वाणी के साथ (चेतिष्ठः) अत्यन्तता से बोध देनेवाले (असुरः) प्राणों में रमते हुए (त्रैवृष्णः) जो तीन में वर्षते वही (त्र्यरुणः) तीन गुणों से युक्त हुए आप (मे) मेरे (मघोनः) अत्यन्त धनयुक्त पुरुषों को (चिकेत) जानें, उनका मैं (मामहे) सत्कार करूँ ॥१॥
Essence
जो पुरुष शकट आदि वाहनों के चलाने में चतुर और अनेक सहस्रों पुरुषों के साथ मेल करते हैं, वे धन-धान्य और पशुओं से युक्त होते हैं ॥१॥
Subject
अब छः ऋचावाले सत्ताईसवें सूक्त का आरम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में अग्निसादृश्य से विद्वान् के गुणों को कहते हैं ॥