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Rigveda Mandal 5 / Sukta 26 / Mantra 4

87 Sukta
9 Mantra
5/26/4
Devata- अग्निः Rishi- वसुयव आत्रेयः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अग्ने॒ विश्वे॑भि॒रा ग॑हि दे॒वेभि॑र्ह॒व्यदा॑तये। होता॑रं त्वा वृणीमहे ॥४॥

अग्ने॑ । विश्वे॑ऽभिः । आ । ग॒हि॒ । दे॒वेऽभिः॑ । ह॒व्यऽदा॑तये । होता॑रम् । त्वा॒ । वृ॒णी॒म॒हे॒ ॥

Mantra without Swara
अग्ने विश्वेभिरा गहि देवेभिर्हव्यदातये। होतारं त्वा वृणीमहे ॥

अग्ने। विश्वेभिः। आ। गहि। देवेभिः। हव्यऽदातये। होतारम्। त्वा। वृणीमहे ॥४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 1 Varga » 19 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) विद्वन् ! जिन (होतारम्) देनेवाले (त्वा) आपका हम लोग (वृणीमहे) स्वीकार करते हैं, वह आप (हव्यदातये) देने योग्य दान के लिये (विश्वेभिः) सम्पूर्ण (देवेभिः) विद्वानों के साथ (आ, गहि) प्राप्त हूजिये ॥४॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि विद्वानों का सत्कार कर उन्हें बुलावें और विद्वान् जन भी विद्वानों के साथ प्राप्त होकर निरन्तर सत्य का उपदेश करें ॥४॥
Subject
फिर विद्वद्विषय को कहते हैं ॥