Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 26 / Mantra 1

87 Sukta
9 Mantra
5/26/1
Devata- अग्निः Rishi- वसुयव आत्रेयः Chhanda- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अग्ने॑ पावक रो॒चिषा॑ म॒न्द्रया॑ देव जि॒ह्वया॑। आ दे॒वान्व॑क्षि॒ यक्षि॑ च ॥१॥

अग्ने॑ । पा॒व॒क॒ । रो॒चिषा॑ । म॒न्द्रया॑ । दे॒व॒ । जि॒ह्वया॑ । आ । दे॒वान् । व॒क्षि॒ । यक्षि॑ । च॒ ॥

Mantra without Swara
अग्ने पावक रोचिषा मन्द्रया देव जिह्वया। आ देवान्वक्षि यक्षि च ॥

अग्ने। पावक। रोचिषा। मन्द्रया। देव। जिह्वया। आ। देवान्। वक्षि। यक्षि। च ॥१॥

Ashtak » 4 Adhyay » 1 Varga » 19 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (पावक) पवित्र और शुद्धि करने तथा (देव) विद्या के देनेवाले (अग्ने) विद्वन् ! जिससे आप (रोचिषा) अति प्रीति से युक्त (मन्द्रया) विज्ञान और आनन्द देनेवाली (जिह्वया) वाणी से इस संसार में (देवान्) विद्वानों और श्रेष्ठ गुणों वा पदार्थों को (आ, वक्षि) सब ओर से प्राप्त होते वा प्राप्त कराते हो तथा (यक्षि) सत्कार करते और मिलते (च) भी हो, इससे सत्कार करने योग्य हो ॥१॥
Essence
जो प्रीति से सत्य उपदेशों को कर और विद्वान् तथा श्रेष्ठ गुणों को प्राप्त होकर अन्यों को प्राप्त कराते हैं, वे ही आदर करने योग्य होते हैं ॥१॥
Subject
अब नव ऋचावाले छब्बीसवें सूक्त का आरम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में अग्निपदवाच्य विद्वान् के गुणों को कहते हैं ॥