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Rigveda Mandal 5 / Sukta 25 / Mantra 8

87 Sukta
9 Mantra
5/25/8
Devata- अग्निः Rishi- वसुयव आत्रेयः Chhanda- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
तव॑ द्यु॒मन्तो॑ अ॒र्चयो॒ ग्रावे॑वोच्यते बृ॒हत्। उ॒तो ते॑ तन्य॒तुर्य॑था स्वा॒नो अ॑र्त॒ त्मना॑ दि॒वः ॥८॥

तव॑ । द्यु॒ऽमन्तः॑ । अ॒र्चयः॑ । ग्रावा॑ऽइव । उ॒च्य॒ते॒ । बृ॒हत् । उ॒तो इति॑ । ते॒ । त॒न्य॒तुः । य॒था॒ । स्वा॒नः । अ॒र्त॒ । त्मना॑ । दि॒वः ॥

Mantra without Swara
तव द्युमन्तो अर्चयो ग्रावेवोच्यते बृहत्। उतो ते तन्यतुर्यथा स्वानो अर्त त्मना दिवः ॥

तव। द्युऽमन्तः। अर्चयः। ग्रावाऽइव। उच्यते। बृहत्। उतो इति। ते। तन्यतुः। यथा। स्वानः। अर्त। त्मना। दिवः ॥८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 1 Varga » 18 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! (तव) आपके (द्युमन्तः) बहुत प्रकाशवाली (अर्चयः) किरणें हैं उनसे जो (ग्रावेव) मेघ के सदृश (बृहत्) बहुत सत्य (उच्यते) कहा जाता (उतो) और (ते) आपका (यथा) जैसे (तन्यतुः) बिजुली वैसे (स्वानः) शब्द वर्त्तमान है, इस कारण (त्मना) आत्मा से (दिवः) प्रकाशयुक्त पदार्थों को तुम सब लोग (अर्त्त) प्राप्त होओ ॥८॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो मेघ के सदृश गम्भीर शब्द से गूढ़ अर्थों के उपदेश देते और बिजुली के सदृश पुरुषार्थ करते हैं, वे सम्पूर्ण सुखों को प्राप्त होते हैं ॥८॥
Subject
अब मेघदृष्टान्त से विद्वद्विषय को कहते हैं ॥