Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 25 / Mantra 1

87 Sukta
9 Mantra
5/25/1
Devata- अग्निः Rishi- बन्धुः सुबन्धुः श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुश्च गौपयाना लौपयाना वा Chhanda- पूर्वार्द्धस्योत्तरार्द्धस्य च भुरिग्बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
अच्छा॑ वो अ॒ग्निमव॑से दे॒वं गा॑सि॒ स नो॒ वसुः॑। रास॑त्पु॒त्र ऋ॑षू॒णामृ॒तावा॑ पर्षति द्वि॒षः ॥१॥

अच्छ॑ । वः॒ । अ॒ग्निम् । अव॑से । दे॒वम् । गा॒सि॒ । सः । नः॒ । वसुः॑ । रास॑त् । पु॒त्रः । ऋ॒षू॒णाम् । ऋ॒तऽवा॑ । प॒र्ष॒ति॒ । द्वि॒षः ॥

Mantra without Swara
अच्छा वो अग्निमवसे देवं गासि स नो वसुः। रासत्पुत्र ऋषूणामृतावा पर्षति द्विषः ॥

अच्छ। वः। अग्निम्। अवसे। देवम्। गासि। सः। नः। वसुः। रासत्। पुत्रः। ऋषूणाम्। ऋतऽवा। पर्षति। द्विषः ॥१॥

Ashtak » 4 Adhyay » 1 Varga » 17 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! आप जिस (देवम्) प्रकाशमान (अग्निम्) अग्नि की (वः) आप लोगों के (अवसे) रक्षण आदि के लिये (अच्छा) उत्तम प्रकार (गासि) प्रशंसा करते हो (सः) वह (वसुः) द्रव्यदाता (ऋषूणाम्) वेदमन्त्रार्थ जानने वालों के (ऋतावा) सत्य का विभाग करनेवाला (पुत्रः) सन्तानरूप (द्विषः) शत्रुओं के (पर्षति) पार जाता है अर्थात् उनको जीतता है, वैसे ही (नः) हम लोगों के लिये (रासत्) देता है अर्थात् विजय दिलाता है ॥१॥
Essence
जैसे विद्वानों का श्रेष्ठ पुत्र विद्वान् होकर तथा लोभ आदि दोषों का त्याग करके पितृ आदिकों को सुख देता है, वैसे ही अग्नि उत्तम प्रकार सिद्धि किया गया सबको सुख देता है ॥१॥
Subject
अब नव ऋचावाले पच्चीसवें सूक्त का आरम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में अग्निविषय को कहते हैं ॥