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Rigveda Mandal 5 / Sukta 2 / Mantra 11

87 Sukta
12 Mantra
5/2/11
Devata- अग्निः Rishi- कुमार आत्रेयो वृषो वा जार उभौ वा Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ए॒तं ते॒ स्तोमं॑ तुविजात॒ विप्रो॒ रथं॒ न धीरः॒ स्वपा॑ अतक्षम्। यदीद॑ग्ने॒ प्रति॒ त्वं दे॑व॒ हर्याः॒ स्व॑र्वतीर॒प ए॑ना जयेम ॥११

ए॒तम् । ते॒ । स्तोम॑म् । तु॒वि॒ऽजा॒त॒ । विप्रः॑ । रथ॑म् । न । धीरः॑ । सु॒ऽअपाः॑ । अ॒त॒क्ष॒म् । यदि॑ । इत् । अ॒ग्ने॒ । प्रति॑ । त्वम् । दे॒व॒ । हर्याः॑ । स्वः॑ऽवतीः । अ॒पः । ए॒न॒ । ज॒ये॒म॒ ॥

Mantra without Swara
एतं ते स्तोमं तुविजात विप्रो रथं न धीरः स्वपा अतक्षम्। यदीदग्ने प्रति त्वं देव हर्याः स्वर्वतीरप एना जयेम ॥११

एतम्। ते। स्तोमम्। तुविऽजात। विप्रः। रथम्। न। धीरः। सुऽअपाः। अतक्षम्। यदि। इत्। अग्ने। प्रति। त्वम्। देव। हर्याः। स्वःऽवतीः। अपः। एना। जयेम ॥११

Ashtak » 3 Adhyay » 8 Varga » 15 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (तुविजात) बहुत विद्वानों में प्रसिद्ध (अग्ने) विद्वन् ! जैसे मैं (ते) आपका (स्वपाः) उत्तम कर्म्म करनेवाला (धीरः) क्षमा आदि गुणों से युक्त और ध्यान करनेवाला (विप्रः) बुद्धिमान् जन के (न) सदृश (एतम्) इस श्रेष्ठ गुणों के प्रकाशक (रथम्) सुन्दर वाहन को (अतक्षम्) बनाता हूँ, वैसे (त्वम्) आचरण कीजिये और हे (देव) सम्पूर्ण विद्या के देनेवाले ! (यदि) जो आप वाहन को रचिये तो (इत्) ही (स्तोमम्) प्रशंसित व्यवहार जिसमें ऐसे सुख को प्राप्त हूजिये और जैसे हम लोग (एना) इससे (हर्याः) कामना करने योग्य अर्थात् सुन्दर (स्वर्वतीः) अच्छे सुखों से युक्त (अपः) प्राणों से युक्त (प्रति, जयेम) प्रति जीतें, वैसे आप इनको जीतिये ॥११
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। हे मनुष्यो ! जैसे विद्वान् जन धर्म्मयुक्त कामनाओं को करके विजयी होते हैं, वैसे ही आप लोग भी आचरण करो ॥११
Subject
फिर विद्वानों के गुणों को कहते हैं ॥